कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने शनिवार को एक साथ आकर सभी मतभेदों और भ्रमों को खारिज कर दिया है। मुख्यमंत्री आवास ‘कावेरी’ में आयोजित एक नाश्ते की बैठक के बाद दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से मीडिया को संबोधित किया, जिससे पिछले कुछ दिनों से जारी सत्ता-साझाकरण के विवाद पर फिलहाल विराम लग गया है।
“न कोई मतभेद, न कोई भ्रम”
- मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने स्पष्ट किया कि उनके और शिवकुमार के बीच कोई भी आंतरिक संघर्ष नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष जानबूझकर राज्य में अस्थिरता का माहौल बनाने के लिए अफवाहें फैला रहा है, लेकिन वे दोनों मिलकर काम कर रहे हैं और पूरी तरह एकजुट हैं।
- उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने भी सिद्धारमैया के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि कांग्रेस हाईकमान का फैसला अंतिम होगा और वे दोनों ही उसका सम्मान करेंगे। उन्होंने कहा कि उनके बीच कोई भ्रम नहीं है और वह पार्टी को कमजोर नहीं होने देंगे।
सत्ता-साझाकरण का विवाद
यह संयुक्त प्रेस वार्ता ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में कांग्रेस सरकार के ढाई साल पूरे होने के बाद ‘सत्ता-साझाकरण’ (Power-Sharing) के कथित फॉर्मूले को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई थी। शिवकुमार समर्थक विधायकों के एक वर्ग ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग की थी, जिससे विवाद और गहरा गया था।
हालांकि, दोनों नेताओं ने अब स्पष्ट कर दिया है कि वे पार्टी के अगले चुनावों को प्राथमिकता देंगे और हाईकमान के किसी भी निर्देश का पालन करेंगे। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी पहले इस मुद्दे पर जल्द समाधान निकालने का आश्वासन दिया था। इस संयुक्त उपस्थिति ने कर्नाटक कांग्रेस में स्थिरता का संदेश दिया है और हाईकमान के लिए अगले कदम का इंतजार बना हुआ है।


