संसद के बजट सत्र के दौरान राज्यसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। केंद्रीय मंत्री और सदन के नेता जेपी नड्डा ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का नाम लिए बिना उन पर कटाक्ष किया और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को नसीहत दे डाली।
नड्डा ने राहुल गांधी को ‘अबोध बालक’ (Immature Child) बताते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी को किसी ऐसे व्यक्ति का “बंधक” नहीं बनना चाहिए जिसे संसदीय मर्यादाओं की समझ नहीं है।
बहस की मुख्य वजह
हंगामे की शुरुआत तब हुई जब मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्यसभा में यह मुद्दा उठाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता (Rahul Gandhi) को बोलने नहीं दिया जा रहा है। खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार लोकतंत्र को कुचलने की कोशिश कर रही है और विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है। उन्होंने कहा, “संसद का मतलब लोकसभा और राज्यसभा दोनों है। अगर एक सदन में नेता प्रतिपक्ष को बोलने नहीं दिया जाएगा, तो दूसरे सदन में इसका असर पड़ेगा।”
जेपी नड्डा का पलटवार
खरगे के आरोपों का जवाब देते हुए जेपी नड्डा ने कड़ा रुख अपनाया:
- संसदीय नियम: नड्डा ने याद दिलाया कि एक सदन (लोकसभा) की कार्यवाही पर दूसरे सदन (राज्यसभा) में चर्चा नहीं की जा सकती।
- ‘अबोध बालक’ टिप्पणी: नड्डा ने खरगे से कहा, “आप हमसे बहुत वरिष्ठ हैं, लेकिन अपनी पार्टी को एक अबोध बालक का बंधक मत बनने दें। अबोध और अहंकार का मिश्रण बहुत खतरनाक होता है।”
- सदन में व्यवधान: नड्डा ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में जवाब देने के लिए तैयार थे, लेकिन विपक्ष ने जानबूझकर हंगामा किया और कार्यवाही नहीं चलने दी।
खरगे और प्रियंका गांधी की प्रतिक्रिया
नड्डा की इस टिप्पणी पर कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई। खरगे ने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा खुद प्रधानमंत्री मोदी की बंधक बनी हुई है और उनके बिना पार्टी में कोई पत्ता भी नहीं हिलता। वहीं, संसद के बाहर प्रियंका गांधी ने भी नड्डा के बयान की निंदा की और सवाल किया कि सरकार राहुल गांधी के बयानों से इतनी डरी हुई क्यों है?
अन्य महत्वपूर्ण बिंदु:
- किरेन रिजिजू का बयान: संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी को लोकसभा में तय समय से 20 मिनट ज्यादा दिए गए थे, लेकिन उन्होंने बार-बार नियमों का उल्लंघन किया।
- मुद्दा: विवाद की एक बड़ी वजह पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की किताब से जुड़े संदर्भों को सदन में उठाए जाने को लेकर थी, जिस पर सत्ता पक्ष ने आपत्ति जताई थी।


