हवाई यात्रा करने वालों के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आ रही है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल के कारण भारत में विमान ईंधन यानी एटीएफ (Aviation Turbine Fuel) की कीमतों ने अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। पहली बार घरेलू उड़ानों के लिए जेट ईंधन की कीमत 2 लाख रुपये प्रति किलोलीटर के पार पहुंच गई है।
एटीएफ की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल
तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने 1 अप्रैल 2026 से हवाई ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की घोषणा की है। इस नए संशोधन के बाद देश के प्रमुख महानगरों में कीमतें इस प्रकार हैं:
- दिल्ली: ₹2,12,450 प्रति किलोलीटर
- मुंबई: ₹2,05,800 प्रति किलोलीटर
- कोलकाता: ₹2,21,340 प्रति किलोलीटर
गौरतलब है कि पिछले एक महीने में ईंधन की कीमतों में यह तीसरी बड़ी बढ़ोतरी है। इससे पहले मार्च के मध्य में भी कीमतों में 15% का इजाफा किया गया था।
हवाई किराया बढ़ने की आशंका
विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी एयरलाइन की परिचालन लागत (Operating Cost) का लगभग 40 से 45 प्रतिशत हिस्सा केवल ईंधन पर खर्च होता है। एटीएफ के दाम 2 लाख के पार जाने से एयरलाइंस पर आर्थिक दबाव काफी बढ़ गया है।
- किराया वृद्धि: इंडिगो, एयर इंडिया और स्पाइसजेट जैसी प्रमुख कंपनियां जल्द ही अपने बेस फेयर (Base Fare) में 15 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर सकती हैं।
- फ्यूल सरचार्ज: एयरलाइंस टिकट बुक करते समय ‘फ्यूल सरचार्ज’ के नाम पर अतिरिक्त शुल्क वसूलना शुरू कर सकती हैं ताकि बढ़ी हुई लागत की भरपाई की जा सके।
मुख्य कारण: ईरान-इजरायल युद्ध और वैश्विक संकट
ईंधन की कीमतों में इस अभूतपूर्व तेजी का सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी संघर्ष है।
- होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना: पिछले एक महीने से इस प्रमुख समुद्री मार्ग के बंद होने से कच्चे तेल की सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो गई है।
- कच्चे तेल की कीमत: अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 130 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई हैं, जिसका सीधा असर भारत में ईंधन की कीमतों पर दिख रहा है।
गर्मियों की छुट्टियों का सीजन शुरू होने वाला है और ऐसे में हवाई किराए में बढ़ोतरी पर्यटन उद्योग और आम यात्रियों के बजट को बिगाड़ सकती है। यदि वैश्विक तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में हवाई यात्रा आम आदमी की पहुंच से और दूर हो सकती है।


