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    इस्राइल ने की सालों तक डिजिटल जासूसी, खामेनेई की हत्या की चौंकाने वाली कहानी?

    ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के पीछे इस्राइली खुफिया एजेंसी मोसाद की वर्षों की कड़ी मेहनत और तकनीकी सेंधमारी की एक चौंकाने वाली कहानी सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह हमला किसी एक दिन की योजना नहीं, बल्कि सालों तक की गई डिजिटल जासूसी का नतीजा था।

    ट्रैफिक कैमरों और मोबाइल नेटवर्क का खेल

    इस्राइल ने खामेनेई की सटीक लोकेशन और उनकी सुरक्षा के अभेद्य घेरे को तोड़ने के लिए ‘साइबर युद्ध’ का सहारा लिया।

    तेहरान के ट्रैफिक कैमरों की हैकिंग: रिपोर्ट के अनुसार, इस्राइल ने कई साल पहले ही तेहरान के लगभग सभी ट्रैफिक कैमरों के नेटवर्क को हैक कर लिया था। इन कैमरों के फुटेज को एन्क्रिप्ट (Encrypt) करके सीधे तेल अवीव के सर्वरों पर भेजा जा रहा था।

    पैटर्न ऑफ लाइफ (Pattern of Life): जटिल एल्गोरिदम की मदद से इस्राइली विश्लेषकों ने खामेनेई के सुरक्षा गार्डों के आने-जाने के रास्ते, उनकी ड्यूटी के घंटे, उनके घर के पते और उनके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों की पहचान की। इससे खामेनेई की दिनचर्या का एक सटीक खाका तैयार हो गया।

    मोबाइल टावरों में दखल: हमले के ठीक पहले, इस्राइल ने खामेनेई के आवास (पाश्चर स्ट्रीट) के पास के लगभग एक दर्जन मोबाइल टावरों को निष्क्रिय या बाधित कर दिया था। इससे उनके सुरक्षा घेरे में मौजूद अधिकारियों के फोन ‘बिजी’ बताने लगे और वे किसी भी संभावित चेतावनी को प्राप्त नहीं कर सके।


    खुफिया जानकारी और सटीक स्ट्राइक

    इस्राइल ने न केवल डिजिटल माध्यमों बल्कि अन्य खुफिया स्रोतों का भी इस्तेमाल किया:

    • यूनिट 8200 और मोसाद: इस्राइल की सिग्नल्स इंटेलिजेंस यूनिट 8200 और मोसाद के ग्राउंड एजेंटों ने मिलकर डेटा और मानवीय जानकारी (Human Assets) का मिलान किया।
    • 60 सेकंड में 3 हमले: जब यह पुष्टि हो गई कि खामेनेई अपने शीर्ष सैन्य कमांडरों के साथ बैठक कर रहे हैं, तो इस्राइली लड़ाकू विमानों ने महज 60 सेकंड के भीतर तीन अलग-अलग ठिकानों पर प्रिसिजन बम (सटीक निशाना लगाने वाले बम) गिराए।
    • पहले यह हमला रात में करने की योजना थी, लेकिन इस्राइल ने इसे सुबह के समय अंजाम देकर ‘सरप्राइज एलिमेंट’ का फायदा उठाया।
    • “हम तेहरान को उतनी ही अच्छी तरह जानते थे जितना कि जेरुसलम को।” — एक अनाम इस्राइली खुफिया अधिकारी
    • यह खुलासा बताता है कि आधुनिक युद्ध में केवल मिसाइलें ही नहीं, बल्कि डेटा और साइबर घुसपैठ सबसे बड़े हथियार बन गए हैं। इस्राइल ने ईरान के अपने ही सुरक्षा बुनियादी ढांचे (कैमरे और फोन नेटवर्क) को उसके खिलाफ इस्तेमाल किया।
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