पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया है। ईरानी नौसेना के कमांडर एडमिरल शहरम ईरानी ने घोषणा की है कि ईरान ने इस क्षेत्र में अपनी आधुनिक और ‘खास’ पनडुब्बियों को तैनात कर दिया है। इन पनडुब्बियों को ‘फारस खाड़ी की डॉल्फिन’ के नाम से भी जाना जा रहा है, जो अपनी विशेष क्षमताओं के कारण चर्चा में हैं।
अदृश्य रहकर अमेरिकी जहाजों पर नजर
ईरान की इस नई तैनाती का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में मौजूद विदेशी ताकतों, विशेष रूप से अमेरिकी युद्धपोतों की निगरानी करना है।
- ट्रैकिंग क्षमता: ये पनडुब्बियां उन्नत रडार और सेंसर सिस्टम से लैस हैं, जो बिना पकड़े गए दुश्मन के जहाजों को ट्रैक कर सकती हैं।
- छोटा आकार, बड़ी चुनौती: ये हल्की और छोटी पनडुब्बियां हैं, जो फारस की खाड़ी के उथले पानी में आसानी से छिप सकती हैं और बड़े जहाजों के लिए घातक साबित हो सकती हैं।
- स्वदेशी तकनीक: एडमिरल शहरम ईरानी के अनुसार, ये पनडुब्बियां पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित हैं और ईरानी नौसेना की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा देती हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य: दुनिया की ‘धमनी’ पर खतरा!
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है।
- टकराव की आशंका: ईरान की इस तैनाती के बाद अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ टकराव बढ़ने की प्रबल संभावना है। पहले भी इस क्षेत्र में जहाजों को जब्त करने और ड्रोन हमलों की घटनाएं हो चुकी हैं।
- ईरान का रुख: ईरान का कहना है कि वह अपनी समुद्री सीमाओं की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेगा।
विशेषज्ञों की चिंता: वैश्विक संकट का डर
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज में मामूली सी भी गलतफहमी हुई, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं:
- तेल की कीमतों में उछाल: यदि तनाव के कारण यह रास्ता बाधित होता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं।
- नौसैनिक घेराबंदी: अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा बहरीन में स्थित है और वे इस क्षेत्र पर लगातार नजर रखते हैं। ईरान की पनडुब्बियों और अमेरिकी जहाजों के बीच सीधी तनातनी से युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
ईरान की यह ‘डॉल्फिन’ पनडुब्बी वास्तव में एक साइलेंट किलर की तरह काम करती है, जो सतह के नीचे रहकर दुश्मन को चौंकाने की क्षमता रखती है। पश्चिम एशिया के इस ‘हॉटस्पॉट’ पर अब पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।


