अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को लेकर कड़ा रुख अपना लिया है। हालिया बयानों में ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी और इजरायली सेना ईरान की मिसाइल क्षमताओं और लॉन्चर्स को तेजी से नष्ट कर रही हैं। यह घटनाक्रम मार्च 2026 में चल रहे ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) के बीच सामने आया है।
ईरान की मिसाइलों पर ट्रंप का दावा
ट्रंप के अनुसार, ईरान के पास अब मिसाइल दागने के लिए सुरक्षित ठिकाने और लॉन्चर्स की भारी कमी हो गई है। ईरान के मिसाइल लॉन्चर्स और साइट्स को “नेस्तनाबूद” (Decimated) किया जा रहा है। ट्रंप का दावा है कि जहां ईरान के हथियार खत्म हो रहे हैं, वहीं अमेरिका के पास ‘मिडल और अपर-मिडल ग्रेड’ हथियारों का असीमित भंडार है। ट्रंप ने यह भी बताया कि ईरानी नौसेना के कई जहाजों को समुद्र की गहराई में डुबो दिया गया है।
ओबामा के परमाणु समझौते (JCPOA) को क्यों बताया ‘बुरा सौदा’?
ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुए 2015 के परमाणु समझौते की कड़े शब्दों में आलोचना की है। उनके अनुसार इसे ‘बुरा सौदा’ कहने के पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- अस्थायी पाबंदियां (Sunset Clauses): ट्रंप का मानना था कि यह समझौता ईरान को केवल कुछ समय के लिए रोकता है, लेकिन लंबी अवधि में उसे परमाणु हथियार बनाने से नहीं रोक पाएगा।
- मिसाइल कार्यक्रम की अनदेखी: इस समझौते में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल विकास पर कोई कड़ा प्रतिबंध नहीं था, जिसे ट्रंप अमेरिका और इजरायल के लिए बड़ा खतरा मानते हैं।
- आतंकवाद को फंडिंग: ट्रंप का तर्क है कि समझौते के तहत ईरान को दी गई ‘प्रतिबंधों में ढील’ से जो पैसा मिला, उसका इस्तेमाल उसने क्षेत्रीय अस्थिरता और आतंकवादी समूहों (जैसे हिजबुल्लाह और हूतियों) को पालने में किया।
- निगरानी में कमी: ट्रंप का आरोप रहा है कि समझौते के तहत ईरानी सैन्य ठिकानों की जांच के नियम पर्याप्त सख्त नहीं थे।
ऊर्जा संकट और टैरिफ की चेतावनी
ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच, ट्रंप ने उन देशों पर भी सख्त टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने की धमकी दी है जो ईरान से तेल या अन्य सामान खरीद रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि अमेरिका का लक्ष्य ईरान को आर्थिक रूप से पूरी तरह अलग-थलग करना है ताकि वह अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को फंड न कर सके।


