पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच रणनीतिक रूप से बेहद अहम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास एक ईरानी वाणिज्यिक जहाज को निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, रविवार तड़के क्वेश्म द्वीप के करीब हुई इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हुए हैं। ब्रिटेन के समुद्री निगरानी संगठन यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने भी होर्मुज से गुजर रहे एक जहाज पर प्रोजेक्टाइल लगने की सूचना दी है। हालांकि, हमले के पीछे किसका हाथ है, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
ईरानी मीडिया ने जहाज पर हमले की जानकारी तो दी है, लेकिन हमलावर या इस्तेमाल किए गए हथियार के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं दी। UKMTO ने भी जहाज पर प्रोजेक्टाइल लगने की पुष्टि की, लेकिन शुरुआती रिपोर्ट में जहाज की क्षति और चालक दल की स्थिति के बारे में पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं थी। बाद में ईरानी सरकारी मीडिया ने एक व्यक्ति की मौत और तीन लोगों के घायल होने की जानकारी दी।
सबसे ज्यादा ध्यान इस बात पर है कि घटना के बाद अमेरिकी सेना की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। यह चुप्पी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच पहले से ही समुद्री मार्ग को लेकर भारी तनाव चल रहा है। ऐसे में किसी ईरानी वाणिज्यिक जहाज पर हमला क्षेत्रीय संघर्ष को और भड़का सकता है।
होर्मुज पर क्यों बढ़ी चिंता?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है। मौजूदा संघर्ष के कारण यहां पहले ही जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। ऐसे में एक और जहाज पर हमले की खबर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। रॉयटर्स के मुताबिक, इस घटनाक्रम के बीच ब्रेंट क्रूड का भाव फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है।
स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि सऊदी अरब ने ड्रोन हमले के बाद अपनी 1,200 किलोमीटर लंबी ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। यह पाइपलाइन रोजाना करीब 40 से 50 लाख बैरल तेल पहुंचाने की क्षमता रखती है, जो वैश्विक आपूर्ति का लगभग 4-5 प्रतिशत है। होर्मुज में संकट और पाइपलाइन बंद होने से ऊर्जा बाजार पर दोहरा दबाव बन गया है।
अमेरिका के सामने बढ़ी चुनौती
अमेरिका के लिए भी मौजूदा स्थिति आसान नहीं है। एक तरफ ईरान के साथ संघर्ष और होर्मुज में समुद्री तनाव है, तो दूसरी तरफ यमन के हूती विद्रोहियों की गतिविधियां बढ़ रही हैं। रॉयटर्स के अनुसार, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हूतियों के खिलाफ सैन्य मदद मांगी थी, लेकिन वॉशिंगटन ने फिलहाल सीधे हस्तक्षेप के बजाय खुफिया सहयोग देने की बात कही है।
इसी बीच ईरान और खाड़ी देशों के बीच ओमान में होर्मुज के भविष्य को लेकर बैठक प्रस्तावित है। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने इसके तत्काल किसी बड़े समझौते में बदलने की संभावना को कम बताया है। ऐसे में जहाज पर हुआ ताजा हमला बातचीत से पहले तनाव कम करने की कोशिशों के लिए भी बड़ा झटका माना जा रहा है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि ईरानी जहाज को निशाना किसने बनाया। हमले की जिम्मेदारी स्पष्ट होने तक अमेरिकी चुप्पी और घटना से जुड़े सीमित विवरण ने सस्पेंस बढ़ा दिया है। हालांकि, इतना तय है कि होर्मुज में बढ़ती अस्थिरता का असर सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है।


