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    ईरान अपनी “एक इंच जमीन” भी नहीं देगा, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने दिया कड़ा संदेश

    ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिका और इस्राइल को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि ईरान अपनी “एक इंच जमीन” पर भी कब्जा नहीं होने देगा। उनका यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ‘बिना शर्त आत्मसमर्पण’ (Unconditional Surrender) की मांग के जवाब में आया है, जिसे पेजेश्कियन ने एक ऐसा “सपना” बताया जिसे दुश्मनों को अपनी “कब्र तक ले जाना होगा।”

    माफी पर सफाई: कमजोरी नहीं, कूटनीति

    हाल ही में पड़ोसी खाड़ी देशों (GCC) से मांगी गई माफी पर ईरान के भीतर ही विरोध शुरू हो गया था। कट्टरपंथियों और सेना के कुछ धड़ों ने इसे ‘राष्ट्रीय अपमान’ बताया। इस पर सफाई देते हुए पेजेश्कियन ने स्पष्ट किया कि खाड़ी देश “हमारे भाई” हैं और ईरान का इरादा उन पर हमला करना नहीं है। माफी का उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव को कम करना था, न कि घुटने टेकना। राष्ट्रपति ने स्वीकार किया कि पिछले कुछ दिनों में पड़ोसियों पर हुए हमले “गलतफहमी” (Miscommunication) और कुछ सैन्य इकाइयों के स्वतंत्र रूप से लिए गए फैसलों (Fire at Will) का परिणाम थे। अब अंतरिम परिषद ने तय किया है कि जब तक किसी पड़ोसी देश की जमीन का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए नहीं होगा, तब तक उन देशों पर कोई मिसाइल नहीं दागी जाएगी।


    युद्ध की वर्तमान स्थिति

    मध्य पूर्व में संघर्ष अपने दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। आज की प्रमुख सैन्य गतिविधियां इस प्रकार हैं:

    क्षेत्रघटना
    तेहरानइस्राइली और अमेरिकी विमानों ने तेहरान के पास 5 प्रमुख तेल ठिकानों और मेहराबाद हवाई अड्डे को निशाना बनाया।
    लेबनानबेका घाटी और नबी चित (हीजबुल्लाह का गढ़) में भीषण हवाई हमले, जिसमें 41 लोगों की मौत की खबर है।
    कुवैतदो अग्निशमन अधिकारियों की मौत, जो ईरान की ओर से दागे गए ड्रोन और मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने के दौरान हुई।

    अंदरूनी दरार और ‘छाया’ सरकार

    रिपोर्ट्स के अनुसार, पेजेश्कियन के शांतिपूर्ण बयानों के बावजूद ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के कुछ गुट अभी भी हमले जारी रखे हुए हैं। यह तेहरान में सत्ता के संघर्ष को दर्शाता है। जहां एक तरफ राष्ट्रपति कूटनीति की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सेना के प्रवक्ता जनरल अबुलफजल शेकरची का कहना है कि “हमने उन देशों को नहीं बख्शा है जिन्होंने अमेरिका को अपनी जमीन का इस्तेमाल करने दिया।” चीन ने भी इस युद्ध की निंदा करते हुए इसे “जंगल का कानून” करार दिया है और वैश्विक समुदाय से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है।

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