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    ईरान ने सऊदी अरब को बनाया निशाना, एयरबेस पर किया भीषण मिसाइल हमला

    मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहा संघर्ष एक नए और अधिक खतरनाक चरण में पहुंच गया है। ताजा घटनाक्रम में ईरान ने सऊदी अरब स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को अपना निशाना बनाया है। ईरान ने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस (Prince Sultan Air Base) पर भीषण मिसाइल हमला किया है। यह एयर बेस अमेरिकी सेना के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    अमेरिकी विमानों को नुकसान

    वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के अनुसार, इस हमले में जमीन पर खड़े अमेरिकी वायुसेना के 5 रिफ्यूलिंग (KC-135 Stratotanker) विमान क्षतिग्रस्त हो गए हैं। ये विमान मध्य-वायु में ईंधन भरने के लिए उपयोग किए जाते हैं और किसी भी बड़े हवाई अभियान की रीढ़ होते हैं।

    अधिकारियों के मुताबिक, विमानों को काफी नुकसान पहुंचा है और उनकी मरम्मत की जा रही है, लेकिन इस विशिष्ट हमले में किसी की जान जाने की खबर नहीं है। सऊदी रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने कई मिसाइलों और ड्रोनों को हवा में ही नष्ट कर दिया, लेकिन कुछ मिसाइलें बेस तक पहुँचने में सफल रहीं।


    अन्य बड़े नुकसान

    यह हमला अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। पिछले कुछ दिनों में इस युद्ध ने गंभीर रूप ले लिया है:

    • इसी सप्ताह गुरुवार को पश्चिमी इराक में एक अमेरिकी KC-135 रिफ्यूलिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें सवार सभी 6 क्रू सदस्यों की मौत हो गई। हालांकि, पेंटागन ने इसे तकनीकी खराबी बताया है, जबकि ईरान समर्थक गुटों ने इसे मार गिराने का दावा किया है।
    • खार्ग द्वीप पर अमेरिकी प्रहार: इससे पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने खार्ग द्वीप को पूरी तरह तबाह करने का दावा किया था।
    • सऊदी तेल क्षेत्रों पर खतरा: प्रिंस सुल्तान एयर बेस के अलावा, ईरान ने सऊदी अरब के शायबा तेल क्षेत्र (Shaybah oil field) पर भी ड्रोन हमले की कोशिश की है, जिसे सऊदी सेना ने विफल करने का दावा किया है।

    वैश्विक प्रभाव

    ईरान द्वारा सीधे सऊदी अरब की धरती पर अमेरिकी संपत्तियों को निशाना बनाना इस युद्ध के विस्तार का संकेत है। इससे न केवल वैश्विक तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन भी पूरी तरह बिगड़ गया है।

    सऊदी अरब और ईरान के बीच बढ़ते सीधे टकराव ने खाड़ी देशों में तैनात अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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