पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भारी तनाव के बीच भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत और राहत की खबर सामने आई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से हुई सफल वार्ता के बाद ईरान ने भारतीय झंडे वाले तेल टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है।
सूत्रों के अनुसार, इस सहमति के बाद कम से कम दो भारतीय तेल टैंकर, ‘पुष्पक’ और ‘परिमल’, इस रणनीतिक मार्ग से सुरक्षित बाहर निकल चुके हैं। यह ऐसे समय में हुआ है जब ईरान ने अमेरिका, इजरायल और यूरोपीय देशों के जहाजों पर कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहाँ से वैश्विक तेल और एलएनजी (LNG) का लगभग 20% व्यापार होता है। भारत के लिए यह मार्ग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उसके कुल एलपीजी आयात का करीब 80% हिस्सा यहीं से होकर आता है।
कूटनीतिक प्रयास
विदेश मंत्री जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री अराघची के बीच मंगलवार शाम को विस्तृत टेलीफोनिक बातचीत हुई। युद्ध शुरू होने के बाद से दोनों नेताओं के बीच यह तीसरी बड़ी बातचीत थी। जयशंकर ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भारत की चिंताओं को प्रमुखता से रखा।
ईरान ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज में अस्थिरता का मुख्य कारण अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई है। हालांकि, भारत के संतुलित रुख और पुराने द्विपक्षीय संबंधों को देखते हुए ईरान ने भारतीय जहाजों को ‘विशेष छूट’ दी है।
इस घटनाक्रम से न केवल भारत की ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित हुई है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ और मजबूत कूटनीति का भी प्रदर्शन हुआ है।


