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    होर्मुज को लेकर ईरान में नया कानून, विदेशी जहाजों से शुल्क वसूलने की तैयारी

    रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर ईरान ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने वैश्विक व्यापार और विशेष रूप से भारत की चिंताएं बढ़ा दी हैं। ईरान की संसद (मजलिस) में एक नया बिल पेश किया गया है, जिसके तहत इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले सभी विदेशी जहाजों से ‘ट्रांजिट टोल’ या ‘सुरक्षा शुल्क’ वसूलने की तैयारी है।

    क्या है नया कानून?

    ईरानी सांसदों द्वारा तैयार किए गए इस कानून के ड्राफ्ट के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों और तेल टैंकरों को ‘सुरक्षित मार्ग’ (Safe Passage) के बदले ईरान को टैक्स चुकाना होगा। ईरान का कहना है कि वह इस क्षेत्र में सुरक्षा प्रदान करने और समुद्री पर्यावरण की रक्षा के लिए भारी खर्च करता है, जिसकी भरपाई अब अंतरराष्ट्रीय जहाजों को करनी चाहिए। दुनिया का लगभग 20-30% कच्चा तेल इसी संकरे रास्ते से गुजरता है। अगर यह टैक्स लागू होता है, तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें और माल ढुलाई (Freight) की लागत बढ़ना तय है।

    भारत के लिए यह खबर चिंताजनक क्यों है?

    भारत के लिए यह खबर “दोहरी मार” की तरह है, क्योंकि हाल ही में ईरान ने भारत के लिए रास्ता खोलने की बात कही थी, लेकिन अब उस पर टैक्स का साया मंडरा रहा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है जो इसी मार्ग से आता है। टैक्स लगने से पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस (LPG) के दाम घरेलू बाजार में बढ़ सकते हैं।

    • भारत के निर्यात पर भी इसका असर पड़ेगा, जिससे भारतीय सामान वैश्विक बाजार में महंगे हो जाएंगे। हालांकि ईरान ने भारत को ‘मित्र देश’ कहा है, लेकिन इस कानून में अभी तक किसी विशेष देश को छूट देने का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।

    अंतरराष्ट्रीय कानून और विरोध

    ईरान के इस कदम को लेकर कानूनी विवाद खड़ा हो सकता है:

    • UNCLOS का उल्लंघन: अंतरराष्ट्रीय नियमों (UN Convention on the Law of the Sea) के अनुसार, होर्मुज जैसे ‘इंटरनेशनल स्ट्रेट’ से जहाजों को ‘इनोसेंट पैसेज’ (Innocent Passage) का अधिकार है और तटीय देश इस पर एकतरफा टैक्स नहीं लगा सकते।
    • अमेरिका का रुख: अमेरिका और उसके सहयोगी देश इसे ईरान की “वसूली” की कोशिश बता रहे हैं, जिससे पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव और बढ़ सकता है।

    क्या भारत को मिलेगी राहत?

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपने मजबूत द्विपक्षीय संबंधों का उपयोग कर ईरान से इस टैक्स में छूट या रियायत की मांग कर सकता है। चूंकि भारत चाबहार बंदरगाह में निवेश कर रहा है, इसलिए ईरान भारत को नाराज करना नहीं चाहेगा।

    यदि यह कानून पारित होता है, तो यह वैश्विक समुद्री व्यापार के इतिहास में एक बड़ा बदलाव होगा और भारत को अपनी ऊर्जा सप्लाई चेन के लिए वैकल्पिक रास्तों पर विचार करना पड़ सकता है।

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