ईरान में शुक्रवार को असंतोष अपनी चरम सीमा पर पहुंच गया है। पिछले 12 दिनों से जारी विरोध-प्रदर्शन अब एक बड़े विद्रोह का रूप ले चुके हैं, जिसे कुचलने के लिए ईरानी अधिकारियों ने पूरे देश में इंटरनेट ब्लैकआउट कर दिया है और अंतरराष्ट्रीय टेलीफोन सेवाओं को भी निलंबित कर दिया है।
विरोध प्रदर्शन का मुख्य कारण
ईरान में यह उबाल गंभीर आर्थिक संकट, मुद्रा ‘रियाल’ में भारी गिरावट और बढ़ती महंगाई की वजह से शुरू हुआ है। 28 दिसंबर से शुरू हुए ये प्रदर्शन अब 21 प्रांतों के 46 से अधिक शहरों तक फैल चुके हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक “मुल्लाओं के शासन” का अंत नहीं होता, देश में खुशहाली नहीं आएगी।
प्रमुख घटनाक्रम और अपडेट
- इंटरनेट और फोन सेवा ठप: नेटब्लॉक्स (NetBlocks) ने पुष्टि की है कि गुरुवार रात से पूरे ईरान में इंटरनेट कनेक्टिविटी लगभग शून्य हो गई है। लैंडलाइन और मोबाइल नेटवर्क को भी बाहरी दुनिया से काट दिया गया है ताकि प्रदर्शनकारी संगठित न हो सकें।
- मृतकों की संख्या में वृद्धि: मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अब तक की हिंसा में कम से कम 45 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें बच्चे और सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। करीब 2,200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
- प्रिंस रजा पहलवी का आह्वान: निर्वासित ईरानी राजकुमार रजा पहलवी के एक आह्वान के बाद गुरुवार रात लाखों लोग सड़कों पर उतर आए, जिसके बाद सरकार ने दमनकारी कदम उठाए।
- सैन्य अलर्ट और एयरस्पेस: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी के बाद ईरान ने अपना हवाई क्षेत्र (Airspace) बंद कर दिया है और सेना को ‘हाई अलर्ट’ पर रखा है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: ट्रंप की चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शासन को खुली चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या जारी रही, तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा और “कड़ी जवाबी कार्रवाई” करेगा। ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों को “बहादुर” बताते हुए कहा कि अमेरिका उनकी आजादी की लड़ाई में उनके साथ खड़ा है।
ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई ने इन प्रदर्शनों को विदेशी शक्तियों (अमेरिका और इजरायल) की साजिश करार दिया है। राजधानी तेहरान में प्रदर्शनकारियों द्वारा मस्जिदों और सरकारी इमारतों में आगजनी की खबरें भी सामने आई हैं।


