अप्रैल 2026 में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ी सैन्य घटना सामने आई है। ईरान के सरकारी मीडिया और सैन्य सूत्रों ने दावा किया है कि एक अमेरिकी पायलट को बचाने के मिशन के दौरान ईरान ने अमेरिका के दो ब्लैक हॉक (Black Hawk) हेलीकॉप्टर और दो सी-130 (C-130) ट्रांसपोर्ट विमानों को नष्ट कर दिया है।
ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, यह घटना दक्षिण इस्फहान (Isfahan) क्षेत्र की है, जहां अमेरिकी सेना अपने एक गिरे हुए लड़ाकू विमान (F-15E स्ट्राइक ईगल) के पायलट को खोजने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही थी।
प्रमुख बिंदु और दावे
- ईरान का दावा: ईरानी सेना का कहना है कि उन्होंने घुसपैठ कर रहे अमेरिकी विमानों को अपने एयर डिफेंस सिस्टम और ज़मीनी हमलों से मार गिराया। ईरान ने सोशल मीडिया और सरकारी टीवी पर मलबे की कुछ तस्वीरें और वीडियो भी जारी किए हैं, जिनमें रेगिस्तानी इलाके में जलते हुए विमान और धुआं दिखाई दे रहा है।
- अमेरिकी पक्ष का बयान: दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मिशन को “अमेरिकी इतिहास के सबसे साहसी खोज और बचाव अभियानों में से एक” बताया है। व्हाइट हाउस ने पुष्टि की कि मिशन के दौरान कुछ विमानों को नुकसान पहुंचा है, लेकिन उन्होंने “नष्ट किए जाने” के दावे को अलग तरीके से पेश किया।
- नुकसान का कारण: अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, रेस्क्यू मिशन के दौरान दो सी-130 विमान रेतीले या ऊबड़-खाबड़ इलाके में फंस गए थे। दुश्मन के हाथ लगने से बचाने के लिए अमेरिकी सेना ने खुद ही उन्हें नष्ट (Intentionally Destroyed) कर दिया।
क्यों शुरू हुआ यह मिशन?
यह पूरा विवाद शुक्रवार (3 अप्रैल 2026) को तब शुरू हुआ जब ईरान ने दावा किया कि उसने दक्षिण-पश्चिमी ईरान के ऊपर एक अमेरिकी F-15E स्ट्राइक ईगल और फारस की खाड़ी के पास एक A-10 वॉर्थोग विमान को मार गिराया। F-15 के दो क्रू मेंबर्स में से एक को तुरंत बचा लिया गया था, लेकिन दूसरा सदस्य लापता था।
उसी लापता सैन्यकर्मी को बचाने के लिए अमेरिका ने दर्जनों विमानों और स्पेशल फोर्सेज (जैसे SEAL Team 6) के साथ एक बड़ा ऑपरेशन शुरू किया। 5 अप्रैल को राष्ट्रपति ट्रंप ने पुष्टि की कि लापता पायलट को सुरक्षित बचा लिया गया है, हालांकि वह घायल है।
जहां ईरान इसे अपनी बड़ी सैन्य जीत और अमेरिका की “कड़वी हार” के रूप में पेश कर रहा है, वहीं अमेरिका इसे एक सफल बचाव मिशन मान रहा है जिसमें पायलट की जान बचाना प्राथमिकता थी। इस घटना ने दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया है।


