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राम मंदिर के CEO के लिए इंटरव्यू, संत समाज में आक्रोश, इस बात से हैं नाराज?

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पद के लिए अयोध्या में साक्षात्कार (इंटरव्यू) की प्रक्रिया चल रही है। इस दौरान उत्तर प्रदेश कैडर के पूर्व आईपीएस अधिकारी और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट राजेश पांडेय का दो बार इंटरव्यू लिया गया है। 5200 से अधिक आवेदनों में से शॉर्टलिस्ट किए गए 18 उम्मीदवारों के साक्षात्कार के बीच इस पद के प्रशासनिक ढांचे को लेकर अयोध्या के संत समाज और विपक्ष ने सवाल उठाए हैं।

चयन प्रक्रिया और इंटरव्यू

उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली की अध्यक्षता वाली चयन समिति उम्मीदवारों का साक्षात्कार ले रही है।

  • उम्मीदवार: साक्षात्कार में पूर्व आईपीएस राजेश पांडेय के अलावा बिहार के पूर्व डीजीपी परेश सक्सेना, पूर्व आईएएस दिनेश चंद्र और पूर्व सैन्य अधिकारी शामिल हैं।
  • पूछे गए सवाल: समिति उम्मीदवारों से भारी भीड़ प्रबंधन, प्रशासनिक क्षमता, पारिवारिक पृष्ठभूमि के साथ-साथ हिंदू धर्म और भगवान राम में उनकी व्यक्तिगत आस्था और जीवनशैली (जैसे खान-पान की आदतें) पर आधारित प्रश्न पूछ रही है।

संत समाज की नाराजगी के मुख्य कारण

संतों और स्थानीय धर्माचार्यों ने इस नियुक्ति प्रक्रिया और ‘CEO’ शब्द के उपयोग पर कड़ा विरोध जताया है:

  • कॉरपोरेट संस्कृति का विरोध: हनुमानगढ़ी के पुजारी देवेशाचार्य ने कहा कि जिस तरह विज्ञापन निकालकर इंटरव्यू लिए जा रहे हैं, उससे लगता है जैसे किसी औद्योगिक संस्थान में CEO नियुक्त किया जा रहा हो। मंदिर का संचालन कॉरपोरेट सिस्टम के तहत नहीं, बल्कि धार्मिक परंपरा के तहत होना चाहिए।
  • सरकारीकरण की आशंका: महंत सीताराम दास ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक पद के जरिए राम मंदिर का ‘सरकारीकरण’ करने की कोशिश की जा रही है।
  • धर्माचार्य पद की मांग: संतों का कहना है कि यदि प्रबंधन को मजबूत करना है, तो वैष्णव परंपरा से जुड़े किसी निष्ठावान संत को ‘प्रधान सेवक’ या ‘धर्माधिकारी’ की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए, न कि किसी पूर्व नौकरशाह को CEO बनाया जाए।

राजनीतिक बयानबाजी

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने भी इस प्रक्रिया पर निशाना साधते हुए कहा कि मंदिर में ‘CEO’ नहीं बल्कि ‘धर्माचार्य’ की नियुक्ति होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि चढ़ावे और वित्तीय प्रबंधन के नाम पर मंदिर व्यवस्था में कॉरपोरेट मॉडल थोपा जा रहा है, जबकि पारदर्शिता के लिए धार्मिक व्यवस्था ही पर्याप्त है।

गौरतलब है कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और वित्तीय प्रबंधन को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से ट्रस्ट एक अनुभवी प्रशासनिक व्यक्ति की तलाश कर रहा है, लेकिन इसके प्रशासनिक पदनाम और स्वरूप को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

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