भारत और अमेरिका ने फरवरी 2026 में एक ऐतिहासिक अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement) के ढांचे को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच हुई वार्ताओं के परिणामस्वरूप आए इस समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूती प्रदान करना और व्यापारिक बाधाओं को कम करना है। यहाँ इस समझौते की प्रमुख बातें और आम लोगों पर इसके संभावित प्रभावों का विस्तार से विवरण दिया गया है:
समझौते की अहम बातें:
- टैरिफ में भारी कटौती: अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया है। यह भारतीय निर्यातकों के लिए एक बहुत बड़ी राहत है।
- शून्य टैरिफ वाले क्षेत्र: कुछ प्रमुख क्षेत्रों जैसे जेनेरिक दवाओं, हीरे-जवाहरात और विमान के पुर्जों पर टैरिफ को घटाकर 0% कर दिया गया है। इससे इन क्षेत्रों में भारतीय दबदबा बढ़ेगा।
- निर्यात को बढ़ावा: टेक्सटाइल, रेडीमेड कपड़े, चमड़ा, जूते, प्लास्टिक, हस्तशिल्प और मशीनरी जैसे क्षेत्रों के लिए अमेरिका का करीब 30 ट्रिलियन डॉलर का विशाल बाजार खुल गया है।
- ऊर्जा और तकनीक में निवेश: अगले 5 वर्षों में भारत अमेरिका से ऊर्जा, विमान, धातु और तकनीक जैसे क्षेत्रों में लगभग 500 अरब डॉलर का सामान खरीदेगा।
- कृषि और डेयरी क्षेत्र की सुरक्षा: भारत ने अपने संवेदनशील क्षेत्रों जैसे गेहूं, चावल, मक्का, दूध, पनीर और पोल्ट्री को इस समझौते से बाहर रखा है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, भारतीय किसानों के हितों की रक्षा के लिए इन उत्पादों पर कोई रियायत नहीं दी गई है।
आम लोगों के लिए क्या बदलेगा?
- रोजगार के नए अवसर: टैरिफ घटने से भारतीय उद्योगों का निर्यात बढ़ेगा, जिससे विनिर्माण (Manufacturing) और सेवा क्षेत्र में लाखों नए रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। इसका सबसे अधिक लाभ युवाओं और महिलाओं को मिलेगा।
- सस्ती मिल सकती हैं कुछ चीजें: अमेरिकी कृषि और औद्योगिक सामान जैसे मेवे, फल, सोयाबीन तेल और पशु आहार पर टैरिफ घटाए जाएंगे, जिससे बाजार में इनकी कीमतें कम हो सकती हैं।
- MSME सेक्टर को मजबूती: भारत के लघु और मध्यम उद्योगों (MSMEs) के लिए अब अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा करना आसान होगा, जिससे छोटे उद्यमियों की आय बढ़ेगी।
- दवाओं की पहुंच: जेनेरिक दवाओं पर ड्यूटी खत्म होने से भारतीय फार्मा कंपनियों का मुनाफा बढ़ेगा, जिसका अप्रत्यक्ष लाभ अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के रूप में आम लोगों को मिल सकता है।
- तकनीकी विकास: डेटा सेंटर, जीपीयू (GPU) और डिजिटल व्यापार में सहयोग बढ़ने से भारत में तकनीक सस्ती और अधिक सुलभ हो सकती है।
- यह समझौता भारत और अमेरिका के बीच एक ‘पूर्ण व्यापार समझौते’ की दिशा में पहला बड़ा कदम माना जा रहा है। जहां एक ओर भारत ने अपने किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखा है, वहीं दूसरी ओर औद्योगिक क्षेत्र के लिए वैश्विक द्वार खोल दिए हैं। आने वाले समय में यह समझौता भारत की GDP वृद्धि और वैश्विक सप्लाई चेन में इसकी भूमिका को नई ऊंचाई पर ले जा सकता है।


