सिंधु जल संधि (IWT) को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव लगातार बढ़ा हुआ है। इसी बीच भारतीय सेना के पूर्व मेजर जनरल हर्षा कक्कड़ ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर और वहां की सरकार को सख्त संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के सामने अब एक ही रास्ता है—आतंकवाद का समर्थन छोड़कर शांति की राह अपनाना।
आतंकवाद छोड़ना होगा
हर्षा कक्कड़ के मुताबिक, पाकिस्तान अगर आतंकवाद को अपनी नीति का हिस्सा बनाए रखता है तो उसे आने वाले समय में गंभीर आर्थिक और राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि भारत अब आतंकवाद के मुद्दे पर पहले जैसा रवैया अपनाने के लिए तैयार नहीं है। उनके बयान में पाकिस्तान को यह संदेश दिया गया कि भारत की सख्त नीति के सामने दबाव बनाने की उसकी कोशिशें कामयाब नहीं होंगी।
सिंधु जल संधि पर बढ़ा विवाद
1960 में हुई सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच छह नदियों के पानी के बंटवारे की व्यवस्था करती है। मौजूदा विवाद के बीच भारत ने संधि को स्थगित रखने का अपना रुख कायम रखा है। दूसरी ओर पाकिस्तान लगातार भारत से संधि के ढांचे के तहत बातचीत की मांग कर रहा है।
हाल में हेग स्थित मध्यस्थता व्यवस्था के फैसले के बाद भी भारत ने उसके अधिकार क्षेत्र और फैसले को स्वीकार नहीं किया। पाकिस्तान इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाकर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
असीम मुनीर की बढ़ी ताकत
इसी बीच पाकिस्तान में असीम मुनीर की सैन्य भूमिका भी पहले से ज्यादा मजबूत हुई है। नए रक्षा कानून के तहत उन्हें चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज बनाया गया है और तीनों सेनाओं पर उनके संचालन संबंधी अधिकार बढ़े हैं। इस बदलाव को पाकिस्तान के सैन्य ढांचे में बड़ा परिवर्तन माना जा रहा है।
हर्षा कक्कड़ का संदेश ऐसे समय आया है, जब पानी, आतंकवाद और सैन्य शक्ति को लेकर भारत-पाकिस्तान संबंध बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रहे हैं। उनका कहना है कि पाकिस्तान के लिए टकराव के बजाय शांति और आतंकवाद से दूरी बनाना ही व्यावहारिक रास्ता है।


