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    अंतरिक्ष में भारत की तीसरी आंख, ISRO ने ‘अन्वेषा’ और 14 उपग्रह किए लॉन्च

    भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 12 जनवरी 2026 को नए साल का शानदार आगाज़ करते हुए अपने ‘वर्कहॉर्स’ रॉकेट PSLV-C62 के जरिए निगरानी उपग्रह ‘अन्वेषा’ (EOS-N1) और 14 अन्य उपग्रहों को सफलतापूर्वक लॉन्च किया है। यह मिशन सुबह 10:17 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से रवाना हुआ।

    ‘अन्वेषा’ (EOS-N1): अंतरिक्ष में भारत की तीसरी आंख

    इस मिशन का मुख्य आकर्षण DRDO द्वारा विकसित उपग्रह ‘अन्वेषा’ है। इसे भारत की निगरानी क्षमताओं को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है।

    • हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग: यह उपग्रह साधारण कैमरों की तरह सिर्फ तस्वीरें नहीं लेता, बल्कि रोशनी की सैकड़ों विभिन्न वेवलेंथ (तरंग दैर्ध्य) को देख सकता है। इससे जमीन पर मौजूद किसी भी सामग्री की सटीक पहचान की जा सकती है।
    • दुश्मनों पर नजर: इस तकनीक की मदद से घने जंगलों या छलावरण (Camouflage) के नीचे छिपे दुश्मन के बंकरों, टैंकों और हथियारों को आसानी से पहचाना जा सकेगा।
    • रणनीतिक महत्व: चीन और पाकिस्तान से लगी सीमाओं पर गतिविधियों की रियल-टाइम निगरानी के लिए यह बेहद प्रभावी साबित होगा।

    मिशन की प्रमुख विशेषताएं

    विवरणजानकारी
    रॉकेटPSLV-C62 (वजन: 260 टन)
    मुख्य पेलोडEOS-N1 ‘अन्वेषा’ (वजन: लगभग 100-150 किग्रा)
    अन्य उपग्रह14 सह-यात्री उपग्रह (घरेलू और विदेशी)
    कक्षा (Orbit)सूर्य-समकालिक कक्षा (Sun-Synchronous Orbit)
    मिशन अवधिलगभग 2 घंटे

    सुरक्षा के साथ नागरिक उपयोग भी

    भले ही अन्वेषा का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा है, लेकिन इसका डेटा अन्य क्षेत्रों में भी क्रांतिकारी बदलाव लाएगा:

    1. कृषि: फसलों के स्वास्थ्य की सटीक जानकारी और रोगों का शुरुआती पता लगाना।
    2. आपदा प्रबंधन: बाढ़, भूकंप और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान नुकसान का सटीक आकलन।
    3. खनिज खोज: जमीन के नीचे छिपे खनिज भंडारों की पहचान करने में मदद।
    4. पर्यावरण: वनों की कटाई और प्रदूषण के स्तर की निगरानी।

    इसरो की वापसी

    यह मिशन इसरो के लिए काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह साल 2026 की पहली लॉन्चिंग है। साथ ही, पिछले साल PSLV-C61 की आंशिक विफलता के बाद इस रॉकेट ने एक बार फिर अपनी विश्वसनीयता साबित की है। इस मिशन में AyulSat जैसा पेलोड भी शामिल है, जो अंतरिक्ष में उपग्रहों की रिफ्यूलिंग (ईंधन भरने) की तकनीक का परीक्षण करेगा।

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