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    पश्चिम एशिया में सैन्य संघर्ष पर आया भारत का रुख, PM मोदी ने कही यह बात

    पश्चिमी एशिया (West Asia) में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरी चिंता व्यक्त की है। 2 मार्च 2026 को नई दिल्ली में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ एक संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत हमेशा से ही विवादों के समाधान के लिए ‘बातचीत और कूटनीति’ (Dialogue and Diplomacy) का पक्षधर रहा है।

    1. ‘बातचीत ही एकमात्र रास्ता’

    प्रधानमंत्री ने पश्चिमी एशिया के मौजूदा हालात को “गंभीर चिंता का विषय” बताया। उन्होंने कहा, भारत ने लगातार सभी पक्षों से संयम बरतने और हिंसा को तुरंत रोकने की अपील की है। पीएम मोदी ने जोर दिया कि जब दो लोकतंत्र एक साथ खड़े होते हैं, तो शांति की पुकार और भी मजबूत हो जाती है। उन्होंने दोहराया कि युद्ध किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता, समाधान केवल कूटनीतिक मेज पर ही संभव है।

    2. भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

    पश्चिमी एशिया में लगभग 90 लाख (9 million) भारतीय नागरिक रहते हैं और काम करते हैं। उनकी सुरक्षा को लेकर पीएम मोदी ने बड़ी बातें कहीं। सरकार क्षेत्र की स्थिति पर पल-पल की नजर बनाए हुए है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने ईरान और इजरायल सहित प्रभावित देशों में भारतीय दूतावासों को अलर्ट पर रखा है और विशेष हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। पीएम मोदी ने कहा, “हम क्षेत्र के सभी देशों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं ताकि वहां मौजूद हर भारतीय नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।”

    3. सीसीएस (CCS) की बैठक और कूटनीतिक सक्रियता

    इससे पहले रविवार (1 मार्च) की रात पीएम मोदी ने सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCS) की उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री एस जयशंकर शामिल हुए। इसमें फंसे हुए भारतीयों को निकालने (Evacuation) की योजना और तेल आपूर्ति (Oil Supply) पर पड़ने वाले प्रभाव की समीक्षा की गई। पीएम मोदी ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से फोन पर बात कर नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा की।


    भारत इस संकट में एक बेहद संतुलित रुख अपना रहा है। एक तरफ जहाँ भारत ने यूएई पर हुए हमलों की निंदा की है, वहीं दूसरी तरफ वह ईरान के साथ अपने ऐतिहासिक संबंधों और इजरायल के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी के बीच शांति दूत की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है।

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