भारतीय शेयर बाजार के लिए सप्ताह का पहला दिन बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुआ है। पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी सैन्य संघर्ष और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच सोमवार, 23 मार्च 2026 को भारतीय बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई।
सेंसेक्स और निफ्टी में ‘ब्लडबाथ’
वैश्विक स्तर पर छाई अनिश्चितता के चलते निवेशकों ने घरेलू बाजार में जमकर बिकवाली की।
- सेंसेक्स: बीएसई (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1556 अंक (लगभग 2.10%) गिरकर 73,000 के स्तर के नीचे पहुँच गया। एक समय कारोबार के दौरान यह 1750 अंकों से भी अधिक टूट गया था।
- निफ्टी: एनएसई (NSE) निफ्टी 50 में भी 400 अंकों से ज्यादा की गिरावट देखी गई, जिससे यह 22,700 के महत्वपूर्ण स्तर के पास कारोबार करता नजर आया।
रुपया ऐतिहासिक निचले स्तर पर
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी दबाव में रहा और पहली बार 93.90 के स्तर को पार कर गया।
- रुपया सोमवार को 93.83 पर खुला और शुरुआती सत्र में ही गिरकर 93.94 के नए रिकॉर्ड निचले स्तर (All-time Low) पर पहुँच गया।
- इसका मुख्य कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FIIs) द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली और आयातकों द्वारा डॉलर की भारी मांग है।
बाजार में गिरावट के प्रमुख कारण
- पश्चिम एशिया संकट: ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में आपूर्ति बाधित होने का डर बना हुआ है।
- कच्चा तेल: ब्रेंट क्रूड की कीमतें $112 प्रति बैरल के पार पहुँच गई हैं, जो भारत जैसी तेल-आयातक अर्थव्यवस्था के लिए मुद्रास्फीति का खतरा बढ़ाती हैं।
- FII आउटफ्लो: विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाजार से भारी मात्रा में पैसा निकाल रहे हैं।
निवेशकों के लिए: इस उतार-चढ़ाव के बीच बैंकिंग, आईटी और रियल्टी सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई है। केवल ONGC जैसे चुनिंदा एनर्जी शेयर ही हरे निशान में कारोबार करते दिखे।


