भारतीय सेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भारत की सैन्य शक्ति को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक ऐतिहासिक ऐलान किया है। भारतीय सेना अब अपनी मारक क्षमता को और अधिक घातक और सटीक बनाने के लिए एक समर्पित ‘रॉकेट और मिसाइल फोर्स’ (Rocket and Missile Force) बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।
क्या है रॉकेट और मिसाइल फोर्स?
यह एक विशेष सैन्य शाखा होगी जिसका मुख्य काम लंबी दूरी तक हमला करने वाले रॉकेटों और मिसाइलों का संचालन करना होगा।
- एकीकृत शक्ति: वर्तमान में मिसाइल क्षमताएं थल सेना, वायु सेना और नौसेना के बीच विभाजित हैं। नई फोर्स इन घातक हथियारों को एक साझा कमान के तहत लाएगी, जिससे युद्ध के समय त्वरित और समन्वित निर्णय लिए जा सकेंगे।
- प्रमुख हथियार: इसमें प्रलय जैसी बैलिस्टिक मिसाइलें, पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्च सिस्टम और ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें शामिल होंगी।
चीन और पाकिस्तान के खिलाफ रणनीति
भारत की यह योजना मुख्य रूप से चीन की बढ़ती आक्रामकता और पाकिस्तान की ओर से होने वाली चुनौतियों को ध्यान में रखकर बनाई गई है:
- चीन (PLA): चीन के पास पहले से ही एक समर्पित ‘रॉकेट फोर्स’ (PLARF) है, जो उसकी सैन्य रणनीति का केंद्र है। एलएसी (LAC) पर चीन की बढ़ती ताकत का मुकाबला करने के लिए भारत को लंबी दूरी के सटीक हथियारों की आवश्यकता है। नई फोर्स बनने से भारत चीन के भीतरी इलाकों और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने में अधिक सक्षम होगा।
- पाकिस्तान: पाकिस्तान की मिसाइल तकनीक काफी हद तक चीन पर निर्भर है। भारत की यह नई फोर्स न केवल पाकिस्तान की ‘फुल स्पेक्ट्रम डेटरेंस’ की नीति का जवाब देगी, बल्कि किसी भी घुसपैठ या हमले की स्थिति में भारी तबाही मचाने की क्षमता रखेगी।
क्यों है यह फैसला अहम?
- नॉन-कॉन्टैक्ट वॉरफेयर: भविष्य के युद्ध जमीन पर सैनिकों की सीधी भिड़ंत से पहले लंबी दूरी के मिसाइल हमलों से तय होंगे। रॉकेट फोर्स भारत को बिना सीमा पार किए दुश्मन को भारी नुकसान पहुंचाने की शक्ति देगी।
- स्वदेशी ताकत: भारत की अधिकांश मिसाइलें (जैसे अग्नि, प्रलय, पिनाका) स्वदेशी हैं। यह फोर्स ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत देश की रक्षा उत्पादन क्षमता को भी वैश्विक स्तर पर मजबूती प्रदान करेगी।
- जनरल उपेंद्र द्विवेदी का यह बयान स्पष्ट संकेत देता है कि भारत अब केवल रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक रक्षा (Offensive Defense) की नीति पर चल रहा है। रॉकेट और मिसाइल फोर्स का गठन दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन (Power Balance) को भारत के पक्ष में झुकाने वाला एक बड़ा कदम साबित होगा।


