भारत के कृषि क्षेत्र के लिए 2026 की शुरुआत एक ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ हुई है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की है कि भारत अब दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश बन गया है। 15.18 करोड़ टन (151.8 मिलियन टन) के रिकॉर्ड उत्पादन के साथ भारत ने दशकों से नंबर-1 रहे चीन को पीछे छोड़ दिया है।
उत्पादन के आंकड़े: भारत बनाम चीन
कृषि मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत ने उत्पादन के मामले में एक लंबी छलांग लगाई है:
- भारत का उत्पादन: 15.18 करोड़ टन (2024-25 फसल वर्ष)
- चीन का उत्पादन: 14.52 करोड़ टन
- वृद्धि का आधार: भारत का वैश्विक चावल उत्पादन में हिस्सा अब 28% से अधिक हो गया है।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे के प्रमुख कारण
भारत की इस सफलता का श्रेय उन्नत तकनीक, किसानों की मेहनत और सरकार की नीतियों को दिया जा रहा है:
- नई बीज किस्में: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने 184 नई फसल किस्में लॉन्च की हैं। पिछले 10 वर्षों में 3,200 से अधिक नई बीज किस्में विकसित की गई हैं, जो कम पानी में अधिक पैदावार देने और जलवायु परिवर्तन के प्रति सहनशील हैं।
- बीज क्रांति: ‘जया’ जैसी बौनी किस्मों और हाल ही में विकसित हाइब्रिड बीजों ने प्रति हेक्टेयर उत्पादकता में भारी सुधार किया है।
- सिंचाई और तकनीक: सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ जैसे अभियानों से धान की खेती का रकबा और उत्पादन दोनों बढ़े हैं।
- अन्नदाता का योगदान: भारत अब न केवल अपनी खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है, बल्कि 170 से अधिक देशों को चावल निर्यात कर ‘दुनिया के अन्न भंडार’ की भूमिका निभा रहा है।
वैश्विक प्रभाव और आर्थिक लाभ
चावल के उत्पादन में शीर्ष पर पहुंचने का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और विदेश नीति पर पड़ेगा:
- विदेशी मुद्रा: 2024-25 में भारत ने चावल निर्यात से लगभग 1.05 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा अर्जित की।
- खाद्य सुरक्षा: भारत के पास वर्तमान में प्रचुर मात्रा में खाद्यान्न भंडार है, जो किसी भी वैश्विक खाद्य संकट के समय देश को सुरक्षित रखता है।
- चावल कूटनीति: भारतीय चावल अब अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण हथियार बन गया है, जो कई विकासशील देशों की खाद्य जरूरतों को पूरा करता है।
“भारत अब सिर्फ अन्न की कमी वाला देश नहीं रहा, बल्कि दुनिया को भोजन उपलब्ध कराने वाला सुपरपावर बन गया है।” – शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय कृषि मंत्री
चुनौतियां और भविष्य का लक्ष्य
नंबर-1 बनने के बाद अब सरकार का ध्यान दाल और तिलहन के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने पर है। कृषि मंत्री ने वैज्ञानिकों से आग्रह किया है कि वे दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए भी इसी तरह की ‘बीज क्रांति’ लाएं ताकि भारत को खाद्य तेल और दालों के आयात पर निर्भर न रहना पड़े।


