जर्मनी की तीन दिवसीय यात्रा पर गए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बर्लिन में पश्चिम एशिया (ईरान-अमेरिका संघर्ष) के संकट पर भारत का पक्ष मजबूती से रखा। जब उनसे ईरान और अमेरिका के बीच भारत की मध्यस्थता की संभावना पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में भारत इस दिशा में एक बड़ी भूमिका निभा सकता है।
भविष्य की भूमिका से इनकार नहीं: राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत शांति का पक्षधर है। उन्होंने स्पष्ट किया, “यह संभावना पूरी तरह से खत्म नहीं की जा सकती कि भविष्य में ऐसा समय आए जब भारत इस दिशा में अपनी भूमिका निभाए और सफल भी हो।”
- PM मोदी का संतुलित दृष्टिकोण: रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का रुख हमेशा संतुलित रहता है। भारत ने शुरू से ही दोनों पक्षों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने और युद्ध खत्म करने की अपील की है।
- वैश्विक शांति के लिए प्रतिबद्धता: उन्होंने दोहराया कि भारत की कूटनीति किसी एक पक्ष के बजाय ‘वैश्विक स्थिरता’ और ‘मानवीय हितों’ पर केंद्रित है।
जर्मनी यात्रा के अन्य महत्वपूर्ण पहलू
रक्षा मंत्री की यह यात्रा केवल कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके रक्षा और रणनीतिक उद्देश्य भी हैं:
- डिफेंस इंडस्ट्रियल रोडमैप: भारत और जर्मनी के बीच रक्षा औद्योगिक सहयोग को लेकर एक महत्वपूर्ण रोडमैप पर हस्ताक्षर होने की संभावना है।
- पनडुब्बी सौदा (Project-75I): सूत्रों के अनुसार, भारतीय नौसेना के लिए 6 उन्नत पनडुब्बियों की आपूर्ति के सौदे पर भी चर्चा अंतिम दौर में है।
- मेक इन इंडिया: राजनाथ सिंह जर्मन रक्षा उद्योग के दिग्गजों से मुलाकात कर उन्हें भारत में सह-उत्पादन (Co-production) और संयुक्त विकास के लिए आमंत्रित कर रहे हैं।
पश्चिम एशिया में बदलती कूटनीति
हाल ही में पाकिस्तान द्वारा मध्यस्थता के प्रयासों और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा युद्धविराम बढ़ाने के फैसलों के बीच राजनाथ सिंह का यह बयान काफी अहम है। विपक्ष (विशेषकर कांग्रेस) ने पहले सरकार को इस मुद्दे पर घेरा था, लेकिन अब रक्षा मंत्री के इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि भारत “वेट एंड वॉच” (रुको और देखो) की स्थिति में है और सही समय आने पर अपनी कूटनीतिक शक्ति का उपयोग करने के लिए तैयार है।


