भारत के कृषि क्षेत्र ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है, जो न केवल देश की आत्मनिर्भरता को दर्शाती है, बल्कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा में भी भारत की अहम भूमिका को उजागर करती है। ‘मायगव हिंदी’ (MyGov Hindi) द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, भारतीय कृषि अब नई ऊंचाइयों पर है।
कृषि क्षेत्र की प्रमुख उपलब्धियां
- चावल उत्पादन में दबदबा: भारत अब 150 मिलियन टन चावल के वार्षिक उत्पादन के साथ दुनिया का सबसे बड़ा (नंबर-1) उत्पादक बन गया है। यह उपलब्धि वैश्विक स्तर पर भारत की कृषि क्षमता को एक नया मुकाम प्रदान करती है।
- कुल खाद्यान्न उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि: खाद्यान्न उत्पादन के मामले में भारत ने लंबी छलांग लगाई है। वर्ष 2014 में जो कुल खाद्यान्न उत्पादन 252 मिलियन टन था, वह अब बढ़कर 357 मिलियन टन के पार पहुंच गया है।
सफलता के पीछे के मुख्य कारक:
इस प्रगति को विशेषज्ञों द्वारा कई महत्वपूर्ण कारकों का परिणाम माना जा रहा है:
- नीतिगत समर्थन: सरकार की विभिन्न योजनाएं जैसे ‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’, मृदा स्वास्थ्य कार्ड और डिजिटल कृषि मिशन ने खेती को आधुनिक बनाने में मदद की है।
- किसानों की मेहनत: उन्नत बीजों, उर्वरकों के संतुलित उपयोग और नई तकनीकों को अपनाकर भारतीय किसानों ने प्रति हेक्टेयर पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि की है।
- जलवायु-अनुकूल खेती: बदलती जलवायु के बीच किसानों ने ऐसी फसलों और तकनीकों को अपनाया है जो जोखिम कम करती हैं।
यह उत्पादन न केवल देश की बढ़ती जनसंख्या के लिए पर्याप्त है, बल्कि भारत को दुनिया भर में ‘खाद्य सुरक्षा’ (Food Security) के एक विश्वसनीय स्तंभ के रूप में स्थापित कर रहा है। कृषि क्षेत्र का यह विकास भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को साकार करने में एक बड़ी भूमिका निभा रहा है।


