वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बीच दुनिया में परमाणु हथियारों को लेकर एक बेहद चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, परमाणु हथियार संपन्न देश अपने परमाणु ज़खीरे को आधुनिक बनाने के साथ-साथ ऑपरेशनल तैनाती भी बढ़ा रहे हैं।
परमाणु मिसाइलों की तैनाती और भारत-चीन की स्थिति
SIPRI रिपोर्ट के अनुसार, भारत और चीन ने अपनी कुछ मिसाइलों में सक्रिय/ऑपरेशनल परमाणु वॉरहेड तैनात करना शुरू कर दिया है। जहां भारत ने अपनी समुद्र-आधारित डिटर्जेंस क्षमता (जैसे परमाणु संचालित पनडुब्बियों) के लिए सीमित संख्या में पहली बार परमाणु हथियार तैनात किए हैं, वहीं चीन ने भी अपनी मिसाइलों को हाई-अलर्ट पर रखने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। यह रुझान दर्शाता है कि दोनों देश संकट की स्थिति में अपनी त्वरित जवाबी हमला करने की क्षमता (Quick Reaction Capability) को मजबूत कर रहे हैं।
दुनिया के 86% न्यूक्लियर हथियार केवल 2 देशों के पास
रिपोर्ट का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला आंकड़ा यह है कि दुनिया भर में मौजूद कुल परमाणु हथियारों का लगभग 86% हिस्सा केवल दो महाशक्तियों—रूस और अमेरिका—के पास है।
- रूस: लगभग 5,400 से अधिक परमाणु वॉरहेड्स के साथ दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु ज़खीरा रखता है।
- अमेरिका: लगभग 5,000 से अधिक परमाणु हथियारों के साथ दूसरे स्थान पर है।
इन दोनों देशों के पास कई हज़ार ऐसे परमाणु वॉरहेड हैं जो हाई-अलर्ट पर मिसाइलों और सैन्य ठिकानों पर तुरंत इस्तेमाल के लिए तैनात हैं।
अन्य प्रमुख देशों की स्थिति
SIPRI के अनुसार, चीन दुनिया में सबसे तेज़ी से अपने परमाणु बेड़े का विस्तार कर रहा है। चीन के पास वॉरहेड्स की संख्या बढ़कर लगभग 600 हो गई है। फ्रांस के पास 290 और ब्रिटेन के पास 225 परमाणु हथियार हैं।
दक्षिण एशिया की बात करें तो भारत का परमाणु भंडार बढ़कर 180-190 के करीब पहुंच गया है, जबकि पाकिस्तान के पास अनुमानित 170 वॉरहेड्स हैं। उत्तर कोरिया और इजराइल भी अपनी परमाणु क्षमताओं का विस्तार और आधुनिकीकरण जारी रखे हुए हैं।
बढ़ती वैश्विक चिंता
शीत युद्ध के बाद से परमाणु हथियारों की कुल संख्या में कमी का दौर अब रुकता दिख रहा है। SIPRI के विशेषज्ञों का मानना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया के बढ़ते तनाव और भारत-चीन सीमा विवाद जैसे वैश्विक भू-राजनीतिक संकटों ने वैश्विक सुरक्षा माहौल को अत्यधिक संवेदनशील बना दिया है। इसके परिणामस्वरूप आने वाले दशक में वैश्विक स्तर पर तैनात परमाणु हथियारों की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना जताई गई है।


