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    IND vs PAK: कोलंबो का R प्रेमदासा स्टेडियम, स्पिनर्स का ‘स्वर्ग’ या बल्लेबाजों की ‘मौज’

    कोलंबो का आर. प्रेमदासा स्टेडियम आज (15 फरवरी 2026) भारत और पाकिस्तान के बीच टी20 विश्व कप के महामुकाबले का गवाह बनने जा रहा है। इस मैदान का इतिहास और पिच का मिजाज अक्सर टॉस जीतने वाले कप्तान की रणनीति तय करता है। आइए जानते हैं यहां के प्रमुख आंकड़े और पिच की चुनौतियां।

    पिच रिपोर्ट: पिच गणित और रिकॉर्ड्स?

    कोलंबो की पिच पारंपरिक रूप से धीमी और स्पिन के अनुकूल मानी जाती है।

    • स्पिनर्स का दबदबा: यहां की काली मिट्टी की पिच पर गेंद रुककर आती है और काफी ग्रिप (पकड़) करती है। मध्य ओवरों में रिस्ट स्पिनर्स (कुलदीप, बिश्नोई) और मिस्ट्री स्पिनर्स (वरुण, उस्मान तारिक) का रोल सबसे अहम होगा।
    • पेसर्स की भूमिका: तेज गेंदबाजों को शुरुआती 2-4 ओवरों में हल्की स्विंग मिल सकती है, लेकिन इसके बाद उन्हें विकेट लेने के लिए ‘कटर’ और ‘स्लोअर वन’ का इस्तेमाल करना होगा। केवल गति (Pace) से यहां रन रोकना मुश्किल है।
    • बड़ी बाउंड्री: इस मैदान की बाउंड्री काफी बड़ी हैं, जिससे छक्के लगाना आसान नहीं होता और स्पिनर्स के खिलाफ जोखिम उठाना बल्लेबाजों के लिए भारी पड़ सकता है।

    क्या यहां बनते हैं 200+ रन?

    आर. प्रेमदासा स्टेडियम में टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में रनों का अंबार लगना थोड़ा दुर्लभ है:

    • उच्चतम स्कोर: इस मैदान पर टी20 का सबसे बड़ा स्कोर 215/5 है, जो बांग्लादेश ने श्रीलंका के खिलाफ 2018 में बनाया था।
    • 200+ का आंकड़ा: अब तक खेले गए 60 से अधिक टी20 मैचों में केवल एक बार ही 200 से ज्यादा का स्कोर बना है।
    • औसत स्कोर: पहली पारी का औसत स्कोर यहाँ 143-152 के बीच रहता है। भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले मैच में 160-170 का स्कोर भी काफी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

    प्रेमदासा स्टेडियम: टी20 आंकड़े (Stats)

    विवरणआंकड़े
    कुल मैच62
    पहले बल्लेबाजी करते हुए जीत26
    पहले गेंदबाजी करते हुए जीत35
    पहली पारी का औसत स्कोर143 रन
    भारत का रिकॉर्ड15 मैच (11 जीत, 4 हार)

    स्पिन बनाम पेस: किसका पलड़ा भारी?

    हालिया मैचों (विशेषकर जिम्बाब्वे बनाम ऑस्ट्रेलिया, 13 फरवरी) के रुझान बताते हैं कि:

    1. स्पिनर्स: विकेटों के मामले में स्पिनर्स का योगदान लगभग 60% रहा है। उनकी इकोनॉमी रेट भी तेज गेंदबाजों से बेहतर रहती है।
    2. टॉस का महत्व: इतिहास में लक्ष्य का पीछा (Chasing) करना यहां आसान रहा है (35 जीत), लेकिन इस टूर्नामेंट में अब तक इस्तेमाल की गई पिचों (Used Pitches) पर पहले बल्लेबाजी करने वाली टीमें हावी रही हैं।

    यदि भारत टॉस जीतता है, तो वे पहले बल्लेबाजी कर एक सुरक्षित स्कोर (170+) खड़ा करना चाहेंगे, क्योंकि दूसरी पारी में पिच और धीमी हो जाती है। हालांकि, शाम को ओस (Dew) गिरने की स्थिति में गेंद गीली हो सकती है, जिससे स्पिनर्स को परेशानी होगी।

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