राजस्थान विधानसभा चुनावों से पहले, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने निर्वाचन आयोग (EC) द्वारा तय की गई समय सीमा पर सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा की सहयोगी शिवसेना ने इस पर पलटवार किया है।
सचिन पायलट का बयान: ‘वोट गरीब काटना चाहती है भाजपा’
कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने निर्वाचन आयोग द्वारा 4 तारीख (दिसंबर) से पहले सभी फॉर्म भरने की समय सीमा को लेकर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, “यह दौरा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि निर्वाचन आयोग ने समय सीमा बांधी है कि 4 तारीख से पहले-पहले सारे फॉर्म भरने हैं। हमने चुनाव आयोग को कहा था कि राजस्थान में चुनाव बहुत दिन बाद है और करोड़ों के फॉर्म भरने में समय लगता है। जो जल्दबाजी वो बिहार में किए थे, वही यहां भी करना चाह रहे हैं।”
- पायलट ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, “पिछले 11 साल में भारत सरकार ने कितने घुसपैठिए को देश के बाहर निकाला है। जब चुनाव आता है तो भाजपा नाम घुसपैठिए का देते हैं, लेकिन वो वोट गरीब, पिछले वर्ग, दलित, आदिवासी समाज का काटना चाहते हैं।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस राजस्थान समेत बाकी प्रदेशों में मुस्तैदी से काम कर रही है, ताकि कोई भी व्यक्ति वंचित न रह जाए। उन्होंने निर्वाचन आयोग से पारदर्शी तरीके से काम करने की अपील की।
शिवसेना का पलटवार: ‘नॉन एलिजिबल वोटर निकलेंगे’
सचिन पायलट के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, शिवसेना नेता शायना एनसी ने कहा कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) अपना काम सही ढंग से कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “SIR (मतदाता सूची संशोधन) और चुनाव आयोग अपना काम कर रहे हैं। जहां तक कोई डुप्लीकेट वोटर है, उनको निष्कासित करना है।” पायलट की चिंता पर सवाल: शायना एनसी ने तंज कसते हुए कहा, “सचिन पायलट को इतनी दिक्कत हो रही है BLO के वेलफेयर को लेकर, तो एक चीज स्पष्ट है कि बूथ लेवल ऑफिसर उस अंदाज से काम कर रहे हैं, जहां SIR को रिवाइज किया जाए, जहां एलिजिबल वोटर को अपना अधिकार मिले और नॉन-एलिजिबल वोटर निकाल दिया जाए।”


