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    खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर प्रहार, हिज्बुल्ला ने इस्राइल पर की रॉकेटों की बौछार

    पश्चिम एशिया में जारी युद्ध अब एक नए और अधिक खतरनाक चरण में प्रवेश कर गया है। आज, 3 मार्च 2026 को ईरान समर्थित गुटों ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भीषण ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर तनाव चरम पर है।

    ईरान द्वारा समर्थित ‘इस्लामिक रेजिस्टेंस’ समूहों ने सऊदी अरब, इराक और बहरीन में अमेरिका के रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया है:

    • सऊदी अरब: रियाद और अल-खर्ज के पास स्थित अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों पर 8 ड्रोन से हमला किया गया। हालांकि सऊदी रक्षा प्रणालियों ने इन्हें मार गिराने का दावा किया है, लेकिन अमेरिकी दूतावास के पास ‘सीमित आग’ लगने की खबरें हैं।
    • इराक: बगदाद के ‘विक्ट्री बेस’ और अन्य अमेरिकी कैंपों पर रॉकेट दागे गए हैं। इराक में मौजूद अमेरिकी सेना को ‘हाई अलर्ट’ पर रखा गया है।
    • बहरीन: यहाँ स्थित अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े (5th Fleet) के मुख्यालय के पास भी ड्रोन गतिविधियों की सूचना मिली है, जो सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है।

    हिज्बुल्ला का इस्राइल पर बड़ा हमला

    लेबनान की सीमा से हिज्बुल्ला ने उत्तरी इस्राइल पर रॉकेटों की बौछार कर दी है।

    • हजारों रॉकेट: हिज्बुल्ला ने दावा किया है कि उसने इस्राइल के सैन्य ठिकानों और गैलिली क्षेत्र को निशाना बनाते हुए सैकड़ों ‘कत्युशा’ रॉकेट दागे हैं।
    • इस्राइल की जवाबी कार्रवाई: इस्राइली वायुसेना ने दक्षिणी लेबनान में हिज्बुल्ला के लॉन्च पैड्स पर भारी बमबारी शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि “दुश्मन को इसकी भारी कीमत चुकानी होगी।”

    ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ और वैश्विक प्रभाव

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में शुरू हुए ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत ईरान के भीतर कमांड सेंटरों को निशाना बनाया जा रहा है।

    1. कच्चे तेल की कीमतें: हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 10% से ज्यादा का उछाल आया है।
    2. भारतीयों के लिए संकट: खाड़ी देशों में लाखों भारतीय कार्यरत हैं। भारत सरकार ने एडवाइजरी जारी कर भारतीयों को सुरक्षित स्थानों पर रहने और गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है।
    3. ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या के बाद शुरू हुआ यह प्रतिशोध का सिलसिला अब पूरे मध्य पूर्व को अपनी चपेट में ले रहा है। यदि यह संघर्ष और फैला, तो यह तीसरे विश्व युद्ध की आहट साबित हो सकता है।
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