उत्तर भारत में बर्फीली हवाओं के तांडव और गिरते पारे के बीच राजधानी दिल्ली ने 7 जनवरी 2026 को इस साल के पहले ‘शीत दिवस’ (Cold Day) का सामना किया। पहाड़ों पर हो रही भारी बर्फबारी का सीधा असर मैदानी इलाकों में दिखने लगा है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
दिल्ली-NCR में कड़ाके की ठंड और ‘कोल्ड डे’
मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, मंगलवार (6 जनवरी) को दिल्ली में सीजन का पहला शीत दिवस दर्ज किया गया था, जिसका असर बुधवार को भी जारी रहा। दिल्ली का अधिकतम तापमान सामान्य से लगभग 3.3 डिग्री गिरकर 15.7°C पर आ गया, जबकि न्यूनतम तापमान 7°C से 8°C के बीच बना हुआ है।
क्या होता है ‘शीत दिवस’ (Cold Day)? जब न्यूनतम तापमान 10°C से कम हो और अधिकतम तापमान सामान्य से कम से कम 4.5°C नीचे गिर जाए, तो उसे मौसम विज्ञान की भाषा में ‘शीत दिवस’ कहा जाता है।
मुख्य बिंदु और आंकड़े
- न्यूनतम पारा: दिल्ली के कई इलाकों जैसे पालम और आयानगर में पारा 6°C से नीचे लुढ़क गया है। यूपी के इटावा में न्यूनतम तापमान 2.6°C दर्ज किया गया, जो मैदानी इलाकों में सबसे कम रहा।
- बर्फीली हवाएं: पहाड़ों से आने वाली उत्तर-पश्चिमी हवाओं की रफ्तार 15-20 किमी प्रति घंटा तक पहुंच गई है, जिससे ‘चिल फैक्टर’ बढ़ गया है और धूप होने के बावजूद लोगों को गलन महसूस हो रही है।
- कोहरे का अलर्ट: मौसम विभाग ने दिल्ली-NCR सहित पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। सुबह के समय दृश्यता (Visibility) 50 मीटर से भी कम रहने के कारण हवाई और रेल यातायात पर बुरा असर पड़ा है।
स्वास्थ्य और प्रदूषण का दोहरा वार
ठंड के साथ-साथ दिल्ली की वायु गुणवत्ता (AQI) भी ‘बहुत खराब’ श्रेणी (310 के पार) में बनी हुई है। डॉक्टरों ने हृदय रोगियों और सांस के मरीजों को सुबह की सैर से बचने की सलाह दी है, क्योंकि कड़ाके की ठंड में धमनियां सिकुड़ने से हार्ट अटैक का खतरा 20-25% बढ़ जाता है।
आगामी पूर्वानुमान: मौसम विभाग के अनुसार, अगले 3-4 दिनों तक उत्तर भारत में शीतलहर (Cold Wave) का प्रकोप जारी रहेगा और तापमान में 1-2 डिग्री की और गिरावट आ सकती है।


