देश भर में आवारा कुत्तों (Stray Dogs) के बढ़ते खतरे और उनके काटने की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (29 जनवरी, 2026) को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह निर्णय लिया। अदालत ने सभी वकीलों और हितधारकों को एक सप्ताह के भीतर अपनी दलीलें लिखित रूप में जमा करने का निर्देश दिया है।
सुनवाई की मुख्य बातें और कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित बनाना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
- ‘हवाई किले’ बना रहे राज्य: कोर्ट ने राज्यों द्वारा दाखिल हलफनामों को ‘मनगढ़ंत कहानियां’ और ‘हवाई किले’ करार दिया। अदालत ने कहा कि कागजों पर तो काम दिख रहा है, लेकिन जमीन पर स्थिति गंभीर है।
- असम का चौंकाने वाला डेटा: सुनवाई के दौरान असम के आंकड़ों पर चिंता जताई गई, जहां 2024 में 1.66 लाख और जनवरी 2025 में ही 20,900 कुत्ते के काटने के मामले सामने आए। कोर्ट ने सवाल किया कि इतने मामलों के बावजूद राज्य में केवल एक ही डॉग सेंटर क्यों है?
- भारी मुआवजे की चेतावनी: इससे पहले की सुनवाई (13 जनवरी) में कोर्ट ने संकेत दिया था कि कुत्ते के काटने से होने वाली मौतों या चोटों के लिए राज्यों को भारी मुआवजा (Heavy Compensation) देना पड़ सकता है।
- संस्थानों से कुत्तों को हटाना: कोर्ट ने नवंबर 2025 के अपने अंतरिम आदेश को दोहराया, जिसमें स्कूलों, अस्पतालों और रेलवे स्टेशनों जैसे संवेदनशील इलाकों से कुत्तों को हटाकर शेल्टर होम भेजने और उन्हें वापस उसी जगह न छोड़ने का निर्देश दिया गया था।
पक्षों की दलीलें
अदालत में डॉग लवर्स, पशु अधिकार कार्यकर्ताओं, पीड़ितों और सरकारों के वकीलों ने अपना पक्ष रखा:
- पशु अधिकार कार्यकर्ता: इनका तर्क है कि कुत्तों को मारना या पूरी तरह हटाना अमानवीय है। वैज्ञानिक तरीके से नसबंदी (ABC Rules) ही जनसंख्या नियंत्रण का सही रास्ता है।
- सरकार/पीड़ित पक्ष: इन्होंने बढ़ते हमलों और रेबीज के मामलों का हवाला देते हुए सड़कों को सुरक्षित बनाने की मांग की।
- NHAI का पक्ष: नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने बताया कि वे राजमार्गों से जानवरों को हटाने और फेंसिंग (बाड़े) लगाने के लिए कदम उठा रहे हैं।
अगला कदम क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट अब सभी लिखित दलीलों का अध्ययन करेगा और उसके बाद अंतिम फैसला सुनाएगा। इस फैसले से यह स्पष्ट हो जाएगा कि आवारा कुत्तों के प्रबंधन, नसबंदी केंद्रों की संख्या बढ़ाने और कुत्तों के काटने पर मुआवजे की जिम्मेदारी किसकी होगी।


