फिल्म ‘हनुमान अंश’ की सफलता के बाद संत नीम करौली बाबा एक बार फिर देशभर में चर्चा में हैं। बाबा का जीवन रहस्यमय घटनाओं, हनुमान भक्ति, सेवा और सादगी से जुड़ा रहा। नैनीताल के पास स्थित कैंची धाम आज उनके सबसे प्रसिद्ध आध्यात्मिक केंद्रों में गिना जाता है। लेकिन आखिर नीम करौली बाबा कौन थे? उनका असली नाम क्या था और कैसे एक साधारण गृहस्थ जीवन से निकलकर वह दुनिया भर में प्रसिद्ध संत बन गए?
कौन थे नीम करौली बाबा?
नीम करौली बाबा को आम तौर पर उनके भक्त बाबा नीम करौली या नीम करोली बाबा के नाम से जानते हैं। हालांकि उनका प्रचलित नाम उनके गांव नीब करोरी से जुड़ा है और इसी वजह से नाम के उच्चारण में समय के साथ बदलाव आया। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले की टूंडला तहसील के अकबरपुर क्षेत्र में हुआ था। उनका वास्तविक नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा बताया जाता है।
बाबा को बचपन से ही आध्यात्मिक प्रवृत्ति वाला माना जाता है। हालांकि उनका जीवन पूरी तरह संन्यासी के रूप में शुरू नहीं हुआ था। वह गृहस्थ जीवन में भी रहे और उनके परिवार में दो बेटे और एक बेटी का उल्लेख मिलता है। बाद के वर्षों में उन्होंने अपना जीवन आध्यात्मिक साधना और मानव सेवा को समर्पित कर दिया।
कैसे बने ‘नीम करौली बाबा’?
बाबा के जीवन से जुड़ी कई कहानियां भक्तों के बीच प्रचलित हैं। कहा जाता है कि उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों में भ्रमण किया और साधना की। इसी दौरान उनकी पहचान एक ऐसे संत के रूप में बनी, जिनके लिए बाहरी दिखावे से ज्यादा भक्ति, प्रेम और सेवा महत्वपूर्ण थे।
उनकी सबसे बड़ी पहचान भगवान हनुमान के परम भक्त के रूप में बनी। बाबा के अनुयायियों के बीच यह विश्वास भी है कि वह हनुमान जी के अंश थे। हालांकि इसे धार्मिक आस्था के रूप में ही देखा जाना चाहिए, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। बाबा स्वयं भी अपनी प्रसिद्धि या चमत्कारों की बजाय सेवा और भक्ति पर जोर देते थे।
कैंची धाम कैसे बना आस्था का केंद्र?
नीम करौली बाबा का नाम सबसे ज्यादा कैंची धाम से जुड़ा है। नैनीताल के पास स्थित यह आश्रम आज देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आध्यात्मिक स्थल है। बाबा ने यहां हनुमान मंदिर की स्थापना और आश्रम के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
हर साल यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। बाबा की शिक्षाओं से प्रभावित लोगों के लिए कैंची धाम केवल मंदिर नहीं, बल्कि सेवा, भक्ति और आध्यात्मिक शांति का केंद्र है।
चमत्कारों की कहानियां भी बनीं पहचान
नीम करौली बाबा के बारे में कई चमत्कारिक किस्से प्रचलित हैं। उनके भक्त उन्हें असाधारण आध्यात्मिक शक्ति वाला संत मानते रहे। ट्रेन रुकने से लेकर जरूरत के समय लोगों की मदद करने तक कई कहानियां उनके अनुयायियों के बीच सुनाई जाती हैं। हालांकि इन घटनाओं को प्रमाणित ऐतिहासिक तथ्य मानने के बजाय बाबा से जुड़ी भक्तिपरक कथाओं के रूप में देखना अधिक उचित है। यही कारण है कि नीम करौली बाबा की कहानी में आस्था और इतिहास दोनों अलग-अलग स्तरों पर दिखाई देते हैं।
यह प्रसिद्ध घटना बाबा नीम करोली (नीब करौरी बाबा) के जीवन से जुड़ी है, जिन्हें हनुमान जी का अवतार माना जाता है। टिकट नहीं होने पर अंग्रेज अधिकारि के आदेश पर उन्हें नीब करोरी गांव के पास ट्रेन से उतार दिया गया। कहानी के अनुसार, जब ट्रेन आगे नहीं बढ़ी और तकनीकी कोशिशें नाकाम रहीं, तब एक भारतीय स्टेशन मास्टर ने अंग्रेज गार्ड को बाबा की महिमा के बारे में बताया। जब अधिकारियों ने हाथ जोड़कर माफी मांगी और बाबा से ट्रेन में लौटने का आग्रह किया, तो बाबा ने सहर्ष सहमति दी। हालांकि, उन्होंने दो शर्तें रखीं-नीब करोरी गांव में एक रेलवे स्टेशन बनाया जाए ताकि ग्रामीणों को सुविधा हो। रेलवे प्रशासन साधुओं और संन्यासियों के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करे। अधिकारियों द्वारा शर्तें स्वीकार करने के बाद जैसे ही बाबा डिब्बे में बैठे, ट्रेन तुरंत चल पड़ी। इस चमत्कार के बाद रेलवे ने नीब करोरी गांव में स्टेशन का निर्माण कराया, जिसे आज ‘नीम करोली रेलवे स्टेशन’ के नाम से जाना जाता है।
विदेशों तक कैसे पहुंचा बाबा का संदेश?
नीम करौली बाबा की प्रसिद्धि भारत तक सीमित नहीं रही। उनके सबसे चर्चित शिष्यों में अमेरिकी आध्यात्मिक शिक्षक राम दास का नाम आता है। उनका मूल नाम रिचर्ड अल्पर्ट था और वह हार्वर्ड विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान के प्रोफेसर थे। वर्ष 1967 में भारत यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात बाबा से हुई। इसके बाद उनका जीवन आध्यात्मिक दिशा में बदल गया और वह राम दास के नाम से प्रसिद्ध हुए। उन्होंने भारतीय आध्यात्मिक विचारों को पश्चिमी दुनिया तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई। यही वह दौर था जब नीम करौली बाबा का नाम भारत से बाहर भी तेजी से पहचाना जाने लगा।
स्टीव जॉब्स और दूसरी हस्तियों से भी जुड़ा नाम
बाबा नीम करौली की लोकप्रियता आधुनिक दौर में भी बनी रही। उनके आश्रम से कई चर्चित लोगों के जुड़ने की बातें सामने आती रही हैं। स्टीव जॉब्स के भारत आने और कैंची धाम से प्रेरित होने का उल्लेख लंबे समय से किया जाता रहा है। टेक जगत के अन्य बड़े नामों के साथ भी बाबा और कैंची धाम की चर्चा होती है।
हालांकि इन हस्तियों और बाबा के बीच संबंधों को लेकर कही जाने वाली हर कहानी को समान रूप से प्रमाणित ऐतिहासिक तथ्य नहीं माना जा सकता। लेकिन इतना स्पष्ट है कि कैंची धाम ने भारत आने वाले कई पश्चिमी साधकों और आध्यात्मिक यात्रियों को आकर्षित किया।
बाबा की सबसे बड़ी सीख क्या थी?
नीम करौली बाबा की शिक्षाओं का केंद्र बहुत सरल था—प्रेम, सेवा और भक्ति। उनके संदेशों में जरूरतमंदों को भोजन कराने, लोगों की मदद करने और सभी के प्रति प्रेम रखने पर जोर मिलता है।
उनकी यही सादगी आज भी लोगों को आकर्षित करती है। उन्होंने बड़े-बड़े दार्शनिक सिद्धांतों की बजाय रोजमर्रा के जीवन में सेवा और करुणा को आध्यात्मिकता का रास्ता बताया।
कब हुआ निधन?
नीम करौली बाबा ने सितंबर 1973 में वृंदावन में शरीर त्याग दिया। उनके निधन के बाद भी उनके अनुयायियों की संख्या लगातार बढ़ती गई। आज कैंची धाम उनके आध्यात्मिक प्रभाव का सबसे बड़ा प्रतीक है।
‘हनुमान अंश’ से फिर चर्चा में क्यों आए?
बाबा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने उनकी कहानी को नई पीढ़ी तक पहुंचाया है। फिल्म बाबा की हनुमान भक्ति, सेवा और आध्यात्मिक जीवन से प्रेरित है। इसे तीन फिल्मों की आध्यात्मिक श्रृंखला के पहले भाग के रूप में बताया गया था।
फिल्म की सफलता ने यह भी दिखाया कि दशकों पहले गुजर चुके एक संत की कहानी आज भी दर्शकों में गहरी दिलचस्पी पैदा कर सकती है। यही नीम करौली बाबा की लोकप्रियता का सबसे बड़ा रहस्य है—उनकी कहानी में चमत्कार से ज्यादा भक्ति, प्रसिद्धि से ज्यादा सेवा और दिखावे से ज्यादा सादगी दिखाई देती है।
इसलिए भक्त उन्हें भले ही ‘हनुमान अंश’ मानते हों, लेकिन ऐतिहासिक नजरिए से नीम करौली बाबा को एक ऐसे संत के रूप में समझना अधिक उचित है, जिन्होंने हनुमान भक्ति, मानव सेवा और प्रेम को अपनी आध्यात्मिक पहचान बनाया और जिसका प्रभाव आज भी भारत से लेकर विदेशों तक दिखाई देता है।


