भारत के रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रेट निकोबार द्वीप समूह परियोजना (Great Nicobar Project) को लेकर देश में राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ के माध्यम से कांग्रेस और राहुल गांधी पर सीधा हमला बोलते हुए इस प्रोजेक्ट के विरोध को ‘चीन के हितों’ से जोड़ दिया है।
भाजपा के गंभीर आरोप
भाजपा ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट एक ऐसा रणनीतिक कदम है जो हिंद महासागर में चीन की विस्तारवादी नीतियों और उसकी नौसेना की दादागिरी पर सीधी लगाम लगाएगा। पार्टी का तर्क है कि:
- यह प्रोजेक्ट भारत को हिंद महासागर का सबसे बड़ा सामरिक केंद्र (Strategic Hub) बनाएगा।
- बीजेपी का आरोप है कि इस प्रोजेक्ट से भारत की बढ़ती ताकत को देखकर चीन की नींद उड़ गई है, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि भारत में इसका विरोध कांग्रेस और राहुल गांधी कर रहे हैं।
- पार्टी ने सवाल उठाया कि “बीजिंग की बेचैनी दिल्ली में कांग्रेस तक क्यों पहुंच रही है?” और “राहुल गांधी किसके हित में इस प्रोजेक्ट को रोकना चाहते हैं?”
क्या है ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट?
72,000 करोड़ रुपये की यह महत्वाकांक्षी परियोजना अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के दक्षिणी सिरे पर विकसित की जा रही है। इसके प्रमुख घटकों में शामिल हैं।
- इंटरनेशनल ट्रांशिपमेंट टर्मिनल: जो वैश्विक समुद्री व्यापार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाएगा।
- रणनीतिक सैन्य अड्डा: हिंद महासागर के ‘चोक पॉइंट्स’ (जैसे मलक्का जलडमरूमध्य) पर निगरानी रखने के लिए नौसैनिक और वायु सेना की उपस्थिति को मजबूत करना।
- ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट और पावर प्लांट।
विरोध का कारण और कांग्रेस का रुख
कांग्रेस और कई पर्यावरणविदों ने इस प्रोजेक्ट का विरोध मुख्य रूप से पर्यावरण और जनजातीय अधिकारों के आधार पर किया है। विपक्षी दलों का कहना है कि इस विशाल निर्माण के लिए लाखों पेड़ों की कटाई होगी, जिससे पारिस्थितिक तंत्र को भारी नुकसान पहुंचेगा। यह परियोजना स्थानीय ‘शौम्पेन’ और ‘निकोबारी’ जनजातियों के अस्तित्व के लिए खतरा पैदा कर सकती है।
भाजपा के हालिया हमले ने अब इस मुद्दे को पर्यावरण से हटाकर ‘राष्ट्रीय सुरक्षा बनाम राजनीति’ के पाले में डाल दिया है। भाजपा इसे देश की सुरक्षा के लिए अनिवार्य बता रही है, जबकि विपक्ष इसे ‘पूंजीपतियों के लाभ’ और ‘पर्यावरण के विनाश’ का जरिया बता रहा है। फिलहाल, यह देखना होगा कि कांग्रेस भाजपा के इन ‘चीन कनेक्शन’ वाले आरोपों पर क्या जवाब देती है।


