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    वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल, ब्रेंट क्रूड की कीमत 112 डॉलर प्रति बैरल के पार

    पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी युद्ध और तनाव के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मची हुई है। सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तूफानी तेजी देखी गई, जिससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं के लिए चिंता बढ़ गई है।

    ब्रेंट क्रूड $112 के पार

    पश्चिम एशिया में इजरायल, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के कारण अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमत 112 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई है। पिछले केवल 30 दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 56% से अधिक का उछाल आया है। वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क WTI क्रूड भी 98 डॉलर के करीब कारोबार कर रहा है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का संकट

    बाजार में इस घबराहट की सबसे बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने का डर है।

    • अल्टीमेटम: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खोलने के लिए दिए गए 48 घंटे के अल्टीमेटम ने तनाव को चरम पर पहुँचा दिया है।
    • ईरान की चेतावनी: जवाब में ईरान ने कहा है कि यदि उसके ऊर्जा बुनियादी ढांचे (Power Plants) पर हमला हुआ, तो वह इस रणनीतिक जलमार्ग को पूरी तरह बंद कर देगा। दुनिया का लगभग 20% तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है।

    भारत पर प्रभाव और आपूर्ति में गिरावट

    भारत जैसे तेल-आयातक देशों के लिए यह स्थिति दोहरी मार जैसी है:

    1. आयात में कमी: मार्च के शुरुआती हफ्तों में भारत के कच्चे तेल के आयात में भारी गिरावट दर्ज की गई है। सऊदी अरब और इराक जैसे देशों से आने वाली सप्लाई प्रभावित हुई है।
    2. महंगाई का खतरा: कच्चे तेल में लगी इस ‘आग’ के कारण घरेलू बाजार में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी (LPG) की कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव बढ़ रहा है, जिससे माल ढुलाई महंगी होने और सामान्य महंगाई बढ़ने की आशंका है।

    मार्केट सेंटीमेंट और भविष्य का अनुमान

    गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) जैसे वैश्विक संस्थानों ने अपने अनुमानों को संशोधित किया है। जानकारों का मानना है कि यदि तनाव इसी तरह जारी रहा और होर्मुज मार्ग बंद हुआ, तो कच्चा तेल 130 से 150 डॉलर प्रति बैरल के डरावने स्तर को भी छू सकता है।


    फिलहाल भारतीय शेयर बाजार और रुपया भी इस तेल संकट के कारण भारी दबाव में हैं।

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