यह कहानी है एक ऐसे व्यक्ति की जिसने शारीरिक अक्षमता और आर्थिक तंगी को कभी अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया। हम बात कर रहे हैं V2 रिटेल (V2 Retail) के संस्थापक रामचंद्र अग्रवाल की, जिन्होंने शून्य से शिखर तक का सफर तय कर भारतीय रिटेल जगत में एक मिसाल पेश की है।
संघर्ष की शुरुआत: बैसाखियों का सहारा
रामचंद्र अग्रवाल का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था। बचपन में ही पोलियो के कारण उनके दोनों पैरों ने काम करना बंद कर दिया। जहाँ समाज में दिव्यांगता को एक अभिशाप माना जाता था, वहीं रामचंद्र ने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उनकी जेब में पैसे नहीं थे, लेकिन आँखों में बड़े सपने थे। उन्होंने अपनी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा बैसाखियों के सहारे काटा, लेकिन उनके हौसले कभी नहीं डगमगाए।
उधार के पैसों से पहला कदम
1986 में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की। उनके पास व्यवसाय शुरू करने के लिए पूंजी नहीं थी, इसलिए उन्होंने उधार के पैसों से कोलकाता के एक छोटे से शोरूम में काम शुरू किया। इसके बाद उन्होंने विशाल मेगा मार्ट (Vishal Mega Mart) की नींव रखी। एक समय ऐसा आया जब विशाल मेगा मार्ट देश के सबसे बड़े रिटेल ब्रांड्स में से एक बन गया, लेकिन 2008 की वैश्विक मंदी ने उन्हें भारी कर्ज में डुबो दिया और उन्हें अपना चलता-चलाया बिजनेस बेचना पड़ा।
शून्य से दोबारा शुरुआत: V2 रिटेल का जन्म
सब कुछ खोने के बाद भी रामचंद्र अग्रवाल ने हार नहीं मानी। उन्होंने फिर से हिम्मत जुटाई और V2 रिटेल (Value and Variety) की शुरुआत की।
- रणनीति: उन्होंने टियर-2 और टियर-3 शहरों पर ध्यान केंद्रित किया।
- लक्ष्य: आम आदमी को किफायती दामों पर फैशनेबल कपड़े उपलब्ध कराना।
- परिणाम: आज V2 रिटेल के देशभर में 100 से अधिक स्टोर्स हैं और कंपनी का टर्नओवर हजारों करोड़ में है।
सफलता के मूल मंत्र
रामचंद्र अग्रवाल की सफलता के पीछे तीन मुख्य स्तंभ रहे हैं:
- दृढ़ संकल्प: शारीरिक बाधाओं के बावजूद कभी हार न मानना।
- जोखिम लेने की क्षमता: एक बड़ा साम्राज्य खोने के बाद दोबारा नई शुरुआत करना।
- आम आदमी की समझ: भारतीय ग्राहकों की नब्ज को पहचानना और कम कीमत में अच्छी क्वालिटी देना।


