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    क्रिकेटर से ग्लोबल स्टार तक का सफर, आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा हैं इरफान खान

    भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली और सहज अभिनेताओं में से एक, इरफान खान की आज (7 जनवरी 2026) 59वीं जयंती है। साल 2020 में उनके निधन के बाद भी, उनकी आँखों की खामोशी और संवादों की गहराई आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा है। ‘मकबूल’ से लेकर ‘पान सिंह तोमर’ तक, इरफान ने हर उस किरदार को अमर कर दिया जिसे उन्होंने पर्दे पर जिया।

    अभिनय का जादूगर: यादगार किरदार

    इरफान खान सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि अभिनय की एक संस्था थे। उनके करियर के कुछ सबसे प्रतिष्ठित किरदार आज भी सिनेमा प्रेमियों के लिए मिसाल हैं:

    • मकबूल (2003): विशाल भारद्वाज की इस फिल्म में इरफान ने शेक्सपियर के ‘मैकबेथ’ को भारतीय अंडरवर्ल्ड के बैकड्रॉप में जीवंत किया। यह फिल्म उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुई।
    • पान सिंह तोमर (2011): एक एथलीट से बागी बनने की इस दर्दनाक दास्तां के लिए इरफान को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से नवाजा गया। इस फिल्म ने साबित किया कि वे जटिल से जटिल भावनाओं को कितनी सहजता से व्यक्त कर सकते हैं।
    • द लंचबॉक्स (2013): साजन फर्नांडिस के रूप में एक अकेले और खामोश व्यक्ति की भूमिका निभाकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा बटोरी।
    • पीकू (2015): अमिताभ बच्चन और दीपिका पादुकोण जैसे सितारों के बीच, राणा चौधरी के रूप में उनकी सादगी और कॉमिक टाइमिंग ने सबका दिल जीत लिया।

    सफलता की कहानी

    इरफान खान का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। राजस्थान के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे इरफान असल में क्रिकेटर बनना चाहते थे।

    1. क्रिकेट का सपना: वे एक बेहतरीन ऑलराउंडर थे और उनका चयन ‘सीके नायडू ट्रॉफी’ के लिए भी हुआ था, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वे मैच खेलने नहीं जा पाए।
    2. नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD): क्रिकेट का रास्ता बंद होने पर उन्होंने अभिनय को चुना और 1984 में स्कॉलरशिप पर NSD में दाखिला लिया।
    3. शुरुआती संघर्ष: मुंबई आने के बाद उन्होंने घरों में AC रिपेयरिंग तक का काम किया। टेलीविजन के छोटे-छोटे किरदारों (जैसे ‘चंद्रकांता’ और ‘चाणक्य’) से अपनी पहचान बनाना शुरू किया।

    हॉलीवुड में भारत की बुलंद आवाज

    इरफान खान बॉलीवुड के उन चंद सितारों में से एक थे जिन्होंने हॉलीवुड में ‘स्टीरियोटाइप’ भूमिकाओं को तोड़ा। उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर पश्चिम में भी अपनी धाक जमाई:

    • लाइफ ऑफ पाई (Life of Pi): ‘ओल्डर पाई’ के रूप में उनके अंतिम मोनोलॉग को दुनिया के बेहतरीन सिनेमाई क्षणों में गिना जाता है।
    • नेमसेक (The Namesake): अशोक गांगुली के किरदार में उन्होंने एक प्रवासी भारतीय के संघर्ष को बखूबी दिखाया।
    • ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’, ‘जुरासिक वर्ल्ड’, ‘इन्फर्नो’ और ‘द अमेजिंग स्पाइडर-मैन’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं।

    उनके बेटे बाबिल खान ने आज सोशल मीडिया पर पुरानी तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, “आपकी यादें और सिखाई हुई बातें ही अब मेरा सहारा हैं।” इरफान खान अक्सर कहते थे, “मुझे लगता है कि हम चीजों को भूल जाते हैं अगर उन्हें बताने के लिए हमारे पास कोई न हो।” आज उनकी जयंती पर पूरी दुनिया उनके उन्हीं किस्सों और किरदारों को याद कर रही है।

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