किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO Summit) के इतर एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कूटनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव की पहली बार द्विपक्षीय मुलाकात हुई। दोनों नेताओं के बीच सोफे पर बैठकर बातचीत करते हुए तस्वीरें सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में यह सवाल तेजी से उठने लगा है कि क्या पाकिस्तान का करीब माना जाने वाला अजरबैजान अब भारत के साथ रिश्तों में जमी बर्फ पिघलाना चाहता है?
मुलाकात की मुख्य विशेषताएं और कूटनीतिक संकेत
- ऐतिहासिक पहला संवाद: प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति अलीयेव के बीच यह पहली आधिकारिक मुलाकात थी। राष्ट्रपति अलीयेव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि उन्होंने बिश्केक में पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय एजेंडे और साझा हितों पर सार्थक विचार-विमर्श किया।
- क्यों तनावपूर्ण रहे हैं भारत-अजरबैजान संबंध?अजरबैजान पारंपरिक रूप से पाकिस्तान और तुर्की के काफी करीब रहा है। कश्मीर मुद्दे पर भी अजरबैजान का रुख अक्सर पाकिस्तान के पक्ष में झुका रहा है। वहीं दूसरी ओर, अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच जारी नगोरनो-काराबाख विवाद के दौरान भारत ने आर्मेनिया को स्वाति वेपन लोकेटिंग रडार, पिनाका रॉकेट सिस्टम और आर्टिलरी गन सप्लाई की थीं, जिससे बाकू (अजरबैजान की राजधानी) बेहद नाराज हुआ था।
- बदलते समीकरण और भू-राजनीतिक मोड़:
- आर्मेनिया-अजरबैजान शांति प्रयास: हाल के महीनों में आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच शांति प्रक्रिया आगे बढ़ी है।
- आर्मेनिया और पाकिस्तान: आर्मेनिया द्वारा पाकिस्तान के साथ कूटनीतिक संबंध स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाए जाने के बाद क्षेत्रीय संतुलन बदल रहा है।
- विदेश मंत्रालय स्तर पर बातचीत: इस साल की शुरुआत में भारत और अजरबैजान के बीच लगभग चार साल के लंबे अंतराल के बाद विदेश कार्यालय स्तर की वार्ता आयोजित की गई थी।
- व्यापार और INSTC का आर्थिक पहलू:तमाम राजनीतिक मतभेदों के बावजूद अजरबैजान भारत के रणनीतिक प्रोजेक्ट ‘अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे’ (INSTC) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत, रूस और यूरोप को जोड़ने वाले इस रूट के लिए बाकू का सहयोग जरूरी है।
अजरबैजान लंबे समय से चीन, पाकिस्तान और तुर्की के धड़े में खड़ा रहा है। हालांकि, भारत की बढ़ती वैश्विक और आर्थिक ताकत को देखते हुए बाकू यह भली-भांति समझता है कि नई दिल्ली को पूरी तरह नजरअंदाज करना उसके आर्थिक और व्यापारिक हितों के अनुकूल नहीं है। पीएम मोदी और इल्हाम अलीयेव की यह मुलाकात दोनों देशों के बीच संबंधों के नए दौर और संभावित ‘रीसेट’ की शुरुआत मानी जा रही है।


