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    अखंड भारत के निर्माता थे सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य, इतिहास के स्वर्णिम युग की रखी थी आधारशिला

    भारतीय इतिहास के स्वर्णिम युग की आधारशिला रखने वाले और मौर्य साम्राज्य के यशस्वी संस्थापक चक्रवर्ती सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य की जयंती के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने सम्राट के जीवन को अदम्य साहस, अद्वितीय कूटनीति और अटूट राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बताते हुए उन्हें ‘अखंड भारत’ का वास्तविक सूत्रधार बताया।

    चाणक्य की दृष्टि और चन्द्रगुप्त का पराक्रम

    केशव प्रसाद मौर्य ने अपने संदेश में विशेष रूप से आचार्य चाणक्य और चन्द्रगुप्त के अटूट संबंध का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह आचार्य चाणक्य का ही कुशल मार्गदर्शन और चन्द्रगुप्त मौर्य का अपराजेय पराक्रम था, जिसने उस कालखंड की जटिल राजनीतिक परिस्थितियों को बदल कर रख दिया। उस समय भारत सोलह महाजनपदों में विभाजित था, जो न केवल आंतरिक कलह से जूझ रहे थे बल्कि विदेशी आक्रांताओं की गिद्ध दृष्टि का भी शिकार थे। सम्राट चन्द्रगुप्त ने अपनी रणनीतिक कुशलता से इन सभी छोटे राज्यों को एक झंडे के नीचे लाकर एक विशाल और सुसंगठित साम्राज्य की स्थापना की।

    विदेशी षड्यंत्रों का समूल नाश

    सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य का शासनकाल केवल सीमाओं के विस्तार का काल नहीं था, बल्कि भारतीय स्वाभिमान की पुनर्स्थापना का युग था। उन्होंने न केवल मगध के अत्याचारी नंद वंश का अंत किया, बल्कि सिकंदर के उत्तराधिकारी सेल्यूकस निकेटर जैसी विदेशी शक्तियों को परास्त कर उन्हें संधि के लिए मजबूर किया। यह उनके असाधारण नेतृत्व का ही परिणाम था कि भारत की सीमाएं उत्तर-पश्चिम में हिंदूकुश की पहाड़ियों तक जा पहुंचीं। विदेशी षड्यंत्रों का सफलतापूर्वक प्रतिकार कर उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि भारत एक अपराजेय शक्ति है।

    ‘अखंड भारत’ की अवधारणा को मिला वास्तविक स्वरूप

    केशव प्रसाद मौर्य ने सम्राट को श्रद्धांजलि देते हुए कहा, “चक्रवर्ती सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य जी केवल एक शासक नहीं, बल्कि ‘अखंड भारत’ की अवधारणा को वास्तविक स्वरूप देने वाले राष्ट्रनिर्माता थे।”

    उन्होंने रेखांकित किया कि आज हम जिस सशक्त और गौरवशाली भारत की कल्पना करते हैं, उसका मूल आधार सम्राट चन्द्रगुप्त ने ही निर्मित किया था। उन्होंने एक ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था दी जो आज के समय में भी लोक कल्याणकारी राज्य के लिए एक आदर्श मानी जाती है। मौर्य काल के दौरान व्यापार, कला और कूटनीति ने नए आयाम स्थापित किए थे, जिससे भारत को ‘विश्व गुरु’ के पद पर प्रतिष्ठित होने में सहायता मिली।

    आत्मगौरव और एकता की प्रेरणा

    सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य का जीवन भारतीय इतिहास के उस स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत है, जो आज भी हर भारतीय को एकता, शक्ति और आत्मगौरव के पथ पर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है। उनकी जयंती मनाना केवल अतीत की महानता को याद करना नहीं है, बल्कि उनके द्वारा दिखाए गए राष्ट्र प्रथम के मार्ग पर चलने का संकल्प लेना है। आज उनके द्वारा स्थापित अखंडता के आदर्शों को आत्मसात करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।


    सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य जयंती पर शत-शत नमन!

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