आज 4 मई 2026 है और आज पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी की 824 विधानसभा सीटों के लिए मतगणना होगी। ये नतीजे सिर्फ राज्यों की नई सरकारें नहीं चुनेंगे, बल्कि यह भी तय करेंगे कि 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए ‘मोदी मैजिक’ का दबदबा बना रहेगा या राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष नई ताकत के साथ उभरेगा।
1. पश्चिम बंगाल: ‘दीदी’ बनाम ‘मोदी’ की सबसे बड़ी जंग
बंगाल में मुकाबला त्रिकोणीय से ज्यादा द्विपक्षीय (TMC vs BJP) नजर आ रहा है। 294 सीटों वाले इस राज्य में ममता बनर्जी अपनी सत्ता बचाने के लिए लड़ रही हैं, वहीं भाजपा ने ‘सोनार बांग्ला’ के नारे के साथ पूरी ताकत झोंक दी है।
- असर: अगर भाजपा यहाँ बहुमत के करीब पहुँचती है, तो यह संदेश जाएगा कि पूर्वी भारत में पीएम मोदी का प्रभाव चरम पर है। वहीं, ममता की जीत क्षेत्रीय क्षत्रपों के मनोबल को बढ़ाएगी।
2. असम और केरल: साख की लड़ाई
- असम: यहाँ भाजपा के लिए सत्ता बरकरार रखना ‘मोदी मैजिक’ की निरंतरता का प्रमाण होगा। राहुल गांधी ने यहाँ धुआंधार प्रचार किया है, जिससे कांग्रेस को ‘कमबैक’ की उम्मीद है।
- केरल: केरल का इतिहास हर पांच साल में सरकार बदलने का रहा है, लेकिन एग्जिट पोल्स ने इस बार कांटे की टक्कर दिखाई है। कांग्रेस नीत UDF की जीत राहुल गांधी के राजनीतिक कद को सीधे तौर पर बढ़ाएगी, क्योंकि केरल उनका मजबूत गढ़ माना जाता है।
3. तमिलनाडु: दक्षिण का नया समीकरण
तमिलनाडु में डीएमके (DMK) और एआईएडीएमके (AIADMK) के पारंपरिक युद्ध के बीच विजय (TVK) की नई पार्टी और भाजपा के बढ़ते कदम इस बार के नतीजों को दिलचस्प बना रहे हैं। दक्षिण भारत में भाजपा की पकड़ का लिटमस टेस्ट आज इसी राज्य से होगा।
क्या होगा राष्ट्रीय राजनीति पर असर?
| प्रमुख कारक | प्रभाव (Impact) |
|---|---|
| मोदी मैजिक | यदि भाजपा बंगाल और असम में जीतती है, तो 2029 के लिए पीएम मोदी की ‘अपराजित’ छवि और मजबूत होगी। |
| राहुल का नेतृत्व | केरल और असम में कांग्रेस का अच्छा प्रदर्शन राहुल गांधी को विपक्षी गठबंधन (I.N.D.I.A.) का निर्विवाद चेहरा बना देगा। |
| क्षेत्रीय दलों का भविष्य | TMC और DMK जैसे दलों का प्रदर्शन तय करेगा कि राष्ट्रीय स्तर पर क्षेत्रीय दलों की कितनी सौदेबाजी की शक्ति (bargaining power) होगी। |
2026 के ये चुनाव परिणाम केवल राज्यों की राजधानियों तक सीमित नहीं रहेंगे। ये दिल्ली के लिए एक ‘मिड-टर्म टेस्ट’ की तरह हैं। दोपहर तक यह स्पष्ट हो जाएगा कि देश की जनता किस दिशा में सोच रही है—विकास के ‘डबल इंजन’ मॉडल के साथ या विपक्ष के ‘न्याय और क्षेत्रीय पहचान’ के वादे के साथ।
बड़ी बात: पश्चिम बंगाल में भारी मतदान (लगभग 92%) ने यह साफ कर दिया है कि जनता ने इस बार बहुत सोच-समझकर बदलाव या निरंतरता के लिए वोट दिया है। क्या आज ‘खेला’ होगा या ‘कमल’ खिलेगा? बस कुछ ही पलों का इंतजार और।


