ईरान और इस्राइल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध के बीच चीन ने कड़ा रुख अपनाते हुए पश्चिमी देशों की सैन्य कार्रवाई की तीखी निंदा की है। बीजिंग में चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दुनिया को फिर से “जंगल के कानून” (Law of the Jungle) की ओर नहीं धकेला जा सकता।
“शक्तिशाली मुक्का सही तर्क नहीं होता”
वांग यी ने कहा कि एक “मजबूत मुक्का” होने का मतलब यह नहीं है कि आपके पास “मजबूत तर्क” भी है। उन्होंने जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय विवादों को सुलझाने के लिए बल प्रयोग कभी भी सही रास्ता नहीं हो सकता। चीन ने अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या और संप्रभु देश पर हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया है। वांग यी ने कहा, “युद्ध अशुभ उपकरण हैं, जिनका उपयोग बिना उचित कारण के नहीं किया जाना चाहिए।” उन्होंने इसे एक ऐसा युद्ध बताया जो कभी शुरू ही नहीं होना चाहिए था और जिससे किसी भी पक्ष का भला नहीं होगा।
चीन की 5 सूत्रीय मांगें
चीन ने इस संकट के समाधान के लिए पांच बुनियादी सिद्धांतों पर जोर दिया है:
- तत्काल संघर्ष विराम: सैन्य अभियानों को तुरंत रोका जाए ताकि स्थिति और अधिक न बिगड़े।
- बल प्रयोग का विरोध: ‘माइट इज राइट’ (शक्ति ही सत्य है) की नीति को खारिज करना।
- आंतरिक मामलों में दखल नहीं: ईरान में ‘सत्ता परिवर्तन’ (Regime Change) की किसी भी कोशिश का चीन कड़ा विरोध करता है।
- कूटनीति की वापसी: विवादों को बातचीत और राजनीतिक माध्यमों से सुलझाया जाए।
- नागरिकों की सुरक्षा: अंतरराष्ट्रीय समुदाय को निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
वैश्विक स्थिरता पर चिंता
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने भी चेतावनी दी है कि इस युद्ध का असर खाड़ी देशों की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहा है। चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से इस मामले में हस्तक्षेप करने और एक आपातकालीन सत्र बुलाने की अपील की है ताकि “जंगल के कानून” को वैश्विक व्यवस्था पर हावी होने से रोका जा सके।
चीन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान का सैन्य ढांचा लगभग “नष्ट” हो चुका है।


