केंद्र सरकार ने कफ सिरप की मनमानी बिक्री पर लगाम लगाने के लिए एक कड़ा कदम उठाया है। देश के विभिन्न हिस्सों और विदेशों में कफ सिरप से बच्चों की मौतों और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर दुष्प्रभावों को देखते हुए, अब अधिकांश कफ सिरप डॉक्टर की पर्ची (प्रिस्क्रिप्शन) के बिना मेडिकल दुकानों पर नहीं बेचे जा सकेंगे। सरकार ने इसे बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए लिया गया एक महत्वपूर्ण फैसला बताया है।
क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
- हाल ही में देश के कई राज्यों, जैसे मध्य प्रदेश में कफ सिरप पीने से 24 बच्चों की मौत के मामले सामने आए थे। साथ ही, विदेशों में निर्यात किए गए भारतीय कफ सिरप में भी घातक रसायन (जैसे डाईथिलीन ग्लाइकॉल) मिलने की शिकायतें आई थीं।
- कई कफ सिरप में कुछ ऐसे तत्व होते हैं जिनका उपयोग लोग नशे के लिए करते हैं। प्रिस्क्रिप्शन अनिवार्य करने से इस तरह के दुरुपयोग पर भी रोक लगेगी।
- सरकार का उद्देश्य है कि खांसी-जुकाम जैसी सामान्य बीमारियों में भी लोग खुद ही दवा लेने के बजाय डॉक्टर से उचित परामर्श लें।
नए नियम और निर्देश
केंद्र की शीर्ष नियामक संस्था औषध परामर्श समिति (Drug Consultative Committee) ने कफ सिरप को उस शेड्यूल से हटाने की मंजूरी दे दी है, जिसके तहत इन्हें लाइसेंसिंग और विशेष निगरानी नियमों से छूट प्राप्त थी। अब कफ सिरप खरीदने के लिए डॉक्टर की सलाह और पर्चा (Prescription) दिखाना अनिवार्य होगा। दवा विक्रेताओं को बेचे गए हर प्रिस्क्रिप्शन का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा। बिना पर्ची के कफ सिरप बेचने वाले मेडिकल स्टोर संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है, जिसमें लाइसेंस रद्द करना भी शामिल हो सकता है।
बच्चों के लिए विशेष सलाह
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय पहले ही एडवाइजरी जारी कर चुका है कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को खांसी-सर्दी की कोई भी दवा नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि यह उनके लिए हानिकारक हो सकती है। ज्यादातर बच्चों की खांसी बिना दवा के ही ठीक हो जाती है। यह कदम बच्चों के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने और देश में दवा नियंत्रण व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।


