संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण आज हंगामेदार रहा। लोकसभा में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्षी दलों (INDIA गठबंधन) द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हुई, जिसे लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखी गई।
अविश्वास प्रस्ताव और कार्यवाही
- 10 घंटे की बहस: सदन में स्पीकर के खिलाफ लाए गए इस प्रस्ताव पर कुल 10 घंटे की चर्चा तय की गई है।
- विपक्ष के आरोप: कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने प्रस्ताव पेश करते हुए सरकार और स्पीकर पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास 200 सांसद होने के बावजूद सदन में ‘डिप्टी स्पीकर’ का पद खाली है और विपक्ष के नेताओं (विशेषकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी) को सदन में अपनी बात रखने की अनुमति नहीं दी जा रही है। उन्होंने इसे संसदीय मर्यादा का उल्लंघन बताया।
- सत्ता पक्ष का जवाब: सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने चर्चा की शुरुआत की। वहीं, बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद, अनुराग ठाकुर और निशिकांत दुबे जैसे नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए सरकार का पक्ष रखा।
- अध्यक्षता पर विवाद: सदन में इस प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल की अध्यक्षता पर भी विपक्ष ने सवाल उठाए, जिसका सरकार ने यह कहते हुए बचाव किया कि स्पीकर के ऑफिस को प्रक्रिया के तहत पैनल चुनने का अधिकार है।
सदन का स्थगन
चर्चा के दौरान लगातार हंगामे और नारेबाजी के कारण लोकसभा की कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। सदन शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयोग और अन्य मुद्दों पर नारेबाजी करते हुए वेल में प्रवेश किया था।
अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम
- संसद के बाहर प्रदर्शन: समाजवादी पार्टी (सपा) के कार्यकर्ताओं ने संसद के बाहर किसानों के लिए आलू के ‘उचित दाम’ की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।
- राज्यसभा: राज्यसभा में भी विपक्षी दलों ने मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) को ‘फर्जी’ बताते हुए हंगामा किया, जिसके चलते कार्यवाही प्रभावित रही।
यह अविश्वास प्रस्ताव भारतीय संसदीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना है, जहाँ विपक्ष अपनी बात रखने के लिए सदन की प्रक्रियाओं का उपयोग कर रहा है, जबकि सरकार इसे राजनीतिक स्टंट करार दे रही है।


