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    साउथ अफ्रीका से हार और 2011 वाला संयोग, क्या T20 वर्ल्ड कप 2026 में कमाल कर पाएगा भारत?

    टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सुपर-8 मुकाबले में साउथ अफ्रीका के हाथों भारत की 76 रनों की करारी हार ने भले ही फैंस को निराश किया हो, लेकिन क्रिकेट के गलियारों में इसे एक ‘शुभ संकेत’ के तौर पर देखा जा रहा है। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में मिली इस हार के बाद सोशल मीडिया और खेल विशेषज्ञों के बीच 2011 के वनडे वर्ल्ड कप से जुड़े एक दिलचस्प संयोग की चर्चा तेज हो गई है।

    भारतीय फैंस के लिए इस हार में उम्मीद की किरण 2011 के उस इतिहास में छिपी है, जब टीम इंडिया ने महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में वर्ल्ड कप जीता था।

    • ग्रुप स्टेज की इकलौती हार: 2011 के वनडे वर्ल्ड कप में भी टीम इंडिया शानदार फॉर्म में थी, लेकिन पूरे टूर्नामेंट में उसे केवल एक हार का सामना करना पड़ा था—और वह हार साउथ अफ्रीका के खिलाफ नागपुर में आई थी।
    • मेजबान भारत: उस समय भी वर्ल्ड कप भारत की धरती पर खेला जा रहा था, और इस बार (2026) भी भारत सह-मेजबान है।
    • इतिहास दोहराने की उम्मीद: 2011 में साउथ अफ्रीका से हारने के बाद भारत ने फाइनल जीता था। अब फैंस को लग रहा है कि 2026 में भी यह हार टीम इंडिया के लिए ‘लकी चार्म’ साबित हो सकती है और वे फिर से ट्रॉफी उठा सकते हैं।

    मैच का लेखा-जोखा: क्या हुआ अहमदाबाद में?

    रविवार (22 फरवरी 2026) को खेले गए इस मुकाबले में टॉस जीतकर पहले बैटिंग करते हुए साउथ अफ्रीका ने 187/7 का स्कोर खड़ा किया।

    • अफ्रीकी बल्लेबाजी: शुरुआत में बुमराह ने झटके दिए थे (20 रन पर 3 विकेट), लेकिन डेविड मिलर (63) और डेवाल्ड ब्रेविस (45) की पारियों ने मैच पलट दिया। अंत में ट्रिस्टन स्टब्स की तूफानी बल्लेबाजी ने भारत को मुश्किल में डाल दिया।
    • भारतीय बल्लेबाजी का पतन: 188 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम ताश के पत्तों की तरह बिखर गई और महज 111 रनों पर ऑलआउट हो गई।
    • फ्लॉप शो: कप्तान सूर्यकुमार यादव (18), ईशान किशन (0) और अभिषेक शर्मा (15) जैसे बड़े नाम फेल रहे। शिवम दुबे (42) ही अकेले लड़ते नजर आए।

    अब आगे क्या?

    इस हार के साथ ही भारत का टी20 वर्ल्ड कप में लगातार 12 मैचों का विजय रथ भी रुक गया है। हालांकि, सेमीफाइनल की रेस अभी खत्म नहीं हुई है। भारत को अब अपने अगले दो मैचों में जिम्बाब्वे (26 फरवरी) और वेस्टइंडीज (1 मार्च) को बड़े अंतर से हराना होगा ताकि नेट रन रेट में सुधार हो सके।

    भारत के लिए ‘करो या मरो’ का रास्ता

    भारत को सेमीफाइनल में सुरक्षित जगह बनाने के लिए निम्नलिखित शर्तों को पूरा करना होगा:

    1. दोनों मैच जीतना अनिवार्य: भारत को अपने अगले दोनों मुकाबले जिम्बाब्वे (26 फरवरी) और वेस्टइंडीज (1 मार्च) के खिलाफ हर हाल में जीतने होंगे। इससे भारत के 4 अंक हो जाएंगे।
    2. नेट रन रेट (NRR) में सुधार: साउथ अफ्रीका से मिली बड़ी हार के कारण भारत का रन रेट माइनस में चला गया है। इसलिए, भारत को जिम्बाब्वे जैसी टीम को बड़े अंतर से हराना होगा ताकि वह अंक बराबर होने की स्थिति में पिछड़ न जाए।
    3. साउथ अफ्रीका बनाम अन्य: अगर साउथ अफ्रीका अपने अगले दोनों मैच (वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे) भी जीत जाता है, तो वह 6 अंकों के साथ टॉप करेगा। ऐसे में भारत को दूसरे स्थान के लिए वेस्टइंडीज से कड़ी टक्कर मिलेगी।

    क्या होगा अगर भारत एक मैच हार जाए?

    यदि भारत वेस्टइंडीज या जिम्बाब्वे में से किसी एक से भी हार जाता है, तो सेमीफाइनल की राह लगभग बंद हो जाएगी। उस स्थिति में भारत को दूसरी टीमों के नतीजों और बहुत ही जटिल ‘नेट रन रेट’ गणित पर निर्भर रहना पड़ेगा, जो कि काफी जोखिम भरा होगा।

    टीम इंडिया के लिए अच्छी खबर

    राहत की बात यह है कि अगले दोनों मैच पुणे और बेंगलुरु में हैं, जहाँ की पिचें भारतीय बल्लेबाजों (विशेषकर सूर्यकुमार यादव और ईशान किशन) को रास आती हैं। साथ ही, हार्दिक पांड्या की गेंदबाजी फॉर्म भारत के लिए प्लस पॉइंट साबित हो सकती है।

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