लॉस एंजेलिस (LA) ओलंपिक 2028 में क्रिकेट की 128 साल बाद वापसी हो रही है। ओलंपिक में देश नहीं, बल्कि नेशनल ओलंपिक कमेटी (NOC) हिस्सा लेती हैं। क्रिकेट की दुनिया में इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स अलग-अलग टीमों के रूप में खेलते हैं, लेकिन ओलंपिक में ये सभी ‘ग्रेट ब्रिटेन’ (Team GB) के बैनर तले एक साथ आते हैं। इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) और क्रिकेट स्कॉटलैंड के बीच बातचीत चल रही है कि एक संयुक्त ‘ग्रेट ब्रिटेन’ टीम बनाई जाए।अगर इंग्लैंड क्वालिफाई करता है, तो वह ‘ग्रेट ब्रिटेन’ के नाम से खेलेगा। इसमें इंग्लैंड के साथ-साथ स्कॉटलैंड और वेल्स के खिलाड़ी भी शामिल हो सकते हैं।
यही चुनौती वेस्टइंडीज के सामने भी है। वेस्टइंडीज कई कैरेबियाई देशों का समूह है, लेकिन ओलंपिक में वे बारबाडोस, जमैका या त्रिनिदाद जैसे अलग-अलग देशों के रूप में खेलते हैं। उन्हें भी किसी एक देश के रूप में या अलग प्रक्रिया से आना होगा।
क्वालिफिकेशन प्रक्रिया: सिर्फ 6 टीमें!
आईसीसी और आईओसी ने तय किया है कि 2028 ओलंपिक में केवल 6 पुरुष और 6 महिला टीमें ही हिस्सा लेंगी। इसका क्वालिफिकेशन मॉडल काफी सख्त है:
| श्रेणी | क्वालिफिकेशन का आधार |
| महाद्वीपीय कोटा (5 सीटें) | एशिया, यूरोप, अफ्रीका, ओशिनिया और अमेरिका से टॉप-रैंक वाली एक-एक टीम। |
| ग्लोबल क्वालिफायर (1 सीट) | एक स्थान उन टीमों के लिए होगा जो अपने महाद्वीप में टॉप पर नहीं रहीं, लेकिन वैश्विक स्तर पर मजबूत हैं। |
| मेजबान देश | अमेरिका को मेजबान होने के नाते सीधा प्रवेश मिलने की प्रबल संभावना है (अंतिम फैसला लंबित)। |
किन टीमों ने हासिल किया क्वालिफिकेशन?
अभी तक किसी भी टीम ने आधिकारिक तौर पर क्वालिफिकेशन हासिल नहीं किया है, क्योंकि इसकी कट-ऑफ डेट और रैंकिंग का आधार 2027 के आसपास तय होगा। हालांकि, वर्तमान टी20 रैंकिंग के आधार पर ये टीमें सबसे आगे हैं:
- भारत (एशिया): अपनी रैंकिंग के कारण भारत का दावा सबसे मजबूत है।
- ऑस्ट्रेलिया (ओशिनिया): न्यूजीलैंड से आगे होने के कारण प्रबल दावेदार।
- इंग्लैंड/ग्रेट ब्रिटेन (यूरोप): यूरोप में टॉप पर होने के कारण इनका स्थान लगभग तय माना जा रहा है।
- दक्षिण अफ्रीका (अफ्रीका): अफ्रीकी महाद्वीप से सबसे मजबूत टीम।
पाकिस्तान, श्रीलंका और न्यूजीलैंड जैसी दिग्गज टीमों के लिए रास्ता मुश्किल हो सकता है, क्योंकि उन्हें या तो अपने महाद्वीप की टॉप टीम को पछाड़ना होगा या ‘ग्लोबल क्वालिफायर’ की कठिन राह चुननी होगी।


