सुप्रीम कोर्ट ने ‘घूसखोर पंडत’ फिल्म के शीर्षक (Title) को लेकर चल रहे विवाद पर सख्त रुख अपनाया है। 12 फरवरी 2026 को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस बीवी नागरत्ना और उज्जल भुयान की पीठ ने फिल्म के विवादित नाम पर कड़ी नाराजगी जताई और फिल्म निर्माता से स्पष्ट शब्दों में पूछा कि वे इस फिल्म का नाम बदलकर क्या रखेंगे? यह मामला एक विशेष समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और एक जाति विशेष को नकारात्मक रूप से चित्रित करने से जुड़ा है।
‘घूसखोर पंडत’ विवाद ने एक बार फिर फिल्म जगत में ‘क्रिएटिव फ्रीडम’ बनाम ‘सामुदायिक सम्मान’ की बहस छेड़ दी है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि निर्माता फिल्म का नया नाम क्या रखते हैं।
सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी की मुख्य वजह
अदालत ने सुनवाई के दौरान निर्माता को फटकार लगाते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर किसी समुदाय की प्रतिष्ठा को धूमिल नहीं किया जा सकता।
- मर्यादा का उल्लंघन: पीठ ने टिप्पणी की कि फिल्म का शीर्षक ‘घूसखोर पंडत’ न केवल अपमानजनक है, बल्कि यह एक जाति को अपराध (भ्रष्टाचार) से जोड़कर समाज में गलत संदेश देता है।
- निर्माता को अल्टीमेटम: सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म निर्माता से कहा, “आप इस तरह का शीर्षक नहीं रख सकते। हमें बताएं कि आप इसे बदलकर क्या नाम देना चाहते हैं? अन्यथा हमें फिल्म की रिलीज पर विचार करना होगा।”
क्या है पूरा विवाद?
- याचिकाकर्ता का तर्क: ब्राह्मण संगठनों और कई याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी थी कि फिल्म का नाम ‘पंडत’ (पंडित का अपभ्रंश) शब्द का इस्तेमाल जानबूझकर एक समुदाय को नीचा दिखाने के लिए किया गया है।
- निर्माता की दलील: फिल्म निर्माता के वकील ने तर्क दिया कि फिल्म एक काल्पनिक कहानी है और इसका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। हालांकि, कोर्ट इस दलील से संतुष्ट नहीं दिखा।
अगली सुनवाई और नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल फिल्म निर्माताओं और संबंधित सेंसर बोर्ड के अधिकारियों को नोटिस जारी किया है।
- नाम बदलने का निर्देश: कोर्ट ने निर्माता को अगले हफ्ते तक वैकल्पिक शीर्षकों (Alternative Titles) की सूची पेश करने का निर्देश दिया है।
- सेंसर बोर्ड की भूमिका: अदालत ने यह भी पूछा कि सेंसर बोर्ड ने इस तरह के आपत्तिजनक शीर्षक के साथ फिल्म को मंजूरी देने पर विचार कैसे किया।


