चीन द्वारा 3 सितंबर को अपनी मिलिट्री परेड में इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) DF-41 का प्रदर्शन करने की खबर से भारत की क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस से इसकी तुलना की जा रही है। हालांकि, यह तुलना सीधे तौर पर सही नहीं है क्योंकि दोनों मिसाइलें अपनी प्रकृति, कार्य और क्षमताओं में बिल्कुल अलग हैं।
डीएफ-41: एक परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल
डीएफ-41 एक इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) है, जिसका मुख्य उद्देश्य परमाणु हमला करना है। इसकी मारक क्षमता 12,000 से 15,000 किलोमीटर तक है, जो इसे दुनिया के किसी भी कोने में लक्ष्य पर हमला करने में सक्षम बनाती है। यह कई परमाणु वॉरहेड ले जा सकती है और हाइपरसोनिक गति (मैक 25 तक) से यात्रा करती है, जिससे इसे रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से रणनीतिक निवारण (strategic deterrence) के लिए किया जाता है।
ब्रह्मोस: एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल
दूसरी ओर, ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जो पारंपरिक (non-nuclear) युद्ध के लिए डिज़ाइन की गई है। इसकी रेंज 290 से 800 किलोमीटर तक है। यह मैक 2.8 से 3.5 की गति से उड़ती है, जो इसे दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइलों में से एक बनाती है। ब्रह्मोस की सबसे बड़ी खासियत इसकी सटीकता, कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता (सी-स्किमिंग), और ‘दागो और भूल जाओ’ (fire and forget) सिद्धांत पर काम करना है। यह दुश्मन के जहाजों और जमीनी ठिकानों को सटीकता से निशाना बना सकती है।
तुलना का कारण
यह तुलना दोनों देशों की सैन्य ताकत के प्रदर्शन से जुड़ी हुई है। चीन अपनी डीएफ-41 के माध्यम से अपनी लंबी दूरी की परमाणु हमला करने की क्षमता को प्रदर्शित कर रहा है, जबकि भारत अपनी ब्रह्मोस से अपनी सटीक और तेज पारंपरिक हमले की क्षमता दिखाता है। हालांकि, दोनों मिसाइलों की भूमिकाएँ और उद्देश्य अलग-अलग हैं, लेकिन वे अपने-अपने क्षेत्र में दुनिया की सबसे उन्नत मिसाइलों में गिनी जाती हैं।


