छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने पवित्र रमजान महीने के मद्देनजर मुस्लिम कर्मचारियों के लिए एक बड़ा और संवेदनशील निर्णय लिया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) शासित इस राज्य में सरकार ने घोषणा की है कि रमजान के दौरान मुस्लिम कर्मचारियों को उनके कार्यालय समय से एक घंटा पहले छुट्टी दी जाएगी।
मुख्यमंत्री का ‘समरसता’ वाला कदम
छत्तीसगढ़ सरकार का यह आदेश उन सभी मुस्लिम अधिकारियों और कर्मचारियों पर लागू होगा जो रोजा (उपवास) रखते हैं। इस छूट का मुख्य उद्देश्य रोजेदारों को शाम के समय ‘इफ्तार’ की तैयारी और इबादत के लिए पर्याप्त समय देना है।
- आदेश की अवधि: यह विशेष छूट रमजान के पूरे महीने, यानी ईद-उल-फितर के चांद दिखने तक प्रभावी रहेगी।
- समय में बदलाव: यदि किसी कार्यालय का समय शाम 5:30 बजे तक है, तो मुस्लिम कर्मचारी शाम 4:30 बजे अपने घर के लिए प्रस्थान कर सकेंगे।
- कार्यान्वयन: सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने इस संबंध में सभी जिला कलेक्टरों और विभागाध्यक्षों को निर्देश जारी कर दिए हैं।
राजनीतिक और सामाजिक मायने
बीजेपी शासित राज्य में इस तरह के फैसले को ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र से जोड़कर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम राज्य में धार्मिक सद्भाव और समावेशी शासन को बढ़ावा देने वाला है।
- धार्मिक सम्मान: सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय कर्मचारियों की धार्मिक भावनाओं और उनकी सुविधा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
- प्रशासनिक संवेदनशीलता: यह पहली बार नहीं है जब किसी राज्य में ऐसी छूट दी गई है, लेकिन छत्तीसगढ़ में बीजेपी सरकार द्वारा इसे लागू करना चर्चा का विषय बना हुआ है।
- कर्मचारी संघ की प्रतिक्रिया: मुस्लिम कर्मचारी संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है।
- यह निर्णय न केवल प्रशासनिक स्तर पर राहत प्रदान करता है, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी एक सकारात्मक संदेश देता है।


