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    सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद पर चला बुलडोजर, सांसद इकरा हसन हाउस अरेस्ट, धारा 144 लागू

    उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले से एक बड़ा मामला सामने आया है, जहाँ कलेक्ट्रेट परिसर (जिलाधिकारी कार्यालय परिसर) स्थित एक मस्जिद के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को लेकर भारी तनाव व्याप्त हो गया है। स्थिति को बिगड़ने से रोकने और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन ने समाजवादी पार्टी की कैराना से सांसद इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोकते हुए उन्हें कैराना स्थित आवास पर ‘हाउस अरेस्ट’ (गृह नजरबंद) कर दिया है।

    कलेक्ट्रेट परिसर में बुलडोजर एक्शन

    सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी ऐतिहासिक मस्जिद को लेकर काफी समय से कानूनी विवाद चल रहा था। प्रशासन का दावा है कि यह ढांचा सरकारी जमीन पर अवैध रूप से निर्मित था। जिला कोर्ट (जिला जज सतेंद्र कुमार) द्वारा मस्जिद पक्ष की अपील खारिज किए जाने के बाद, भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में 5 सितंबर 2026 की सुबह बुलडोजर चलाकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई।

    सांसद इकरा हसन हाउस अरेस्ट

    मस्जिद को ढाए जाने की खबर सामने आते ही विपक्षी दलों के नेताओं ने घटनास्थल पर जाने का प्रयास किया। कैराना से सपा सांसद इकरा हसन जैसे ही सहारनपुर के लिए रवाना होने वाली थीं, शामली और कैराना पुलिस ने उन्हें उनके आवास पर ही रोक दिया। पुलिस ने उनके घर के बाहर भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया है।

    प्रशासन का कहना है कि क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी तरह के विरोध-प्रदर्शन या धार्मिक तनाव को रोकने के लिए एहतियातन यह कदम उठाया गया है।

    सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता और इलाके में धारा 144

    ध्वस्तीकरण स्थल के आसपास और पूरे सहारनपुर शहर में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

    • कलेक्ट्रेट जाने वाले सभी रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी गई है।
    • भारी पुलिस बल, पीएसी (PAC) और त्वरित कार्य बल (RAF) की टीमों को तैनात किया गया है।
    • जिले में शांति बनाए रखने के लिए धारा 144 (प्रकटीकरण/निषेधाज्ञा) लागू कर दी गई है और इंटरनेट सेवाओं पर भी निगरानी रखी जा रही है।

    राजनीतिक हलचलों और विरोध में हलचल

    मस्जिद गिराए जाने और सांसद इकरा हसन को हाउस अरेस्ट किए जाने की घटना के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति गर्मा गई है। स्थानीय सांसद इमरान मसूद समेत समाजवादी पार्टी और मुस्लिम संगठनों के नेताओं ने इस कार्रवाई का कड़ा विरोध किया है। विपक्ष का आरोप है कि प्रशासन ने जल्दबाजी में यह कदम उठाया है और कानूनी विकल्पों का पूरा मौका नहीं दिया, जबकि प्रशासन इसे अदालती आदेश का पालन बता रहा है। स्थिति फिलहाल तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है, और पुलिस प्रशासन हर तरह की गतिविधि पर नजर बनाए हुए है।

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