मुंबई महानगरपालिका (BMC) के 16 जनवरी 2026 को आए चुनाव परिणामों ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत कर दी है। देश की सबसे अमीर नगर निकाय पर पिछले करीब तीन दशकों से चला आ रहा ठाकरे परिवार का वर्चस्व अब समाप्त हो गया है। इस जीत के सबसे बड़े नायक बनकर उभरे हैं देवेंद्र फडणवीस, जिनकी रणनीति ने ‘मातोश्री’ के अभेद्य किले को ढहा दिया।
चुनावी नतीजों का विश्लेषण
मुंबई की 227 सीटों में से महायुति (BJP + एकनाथ शिंदे सेना) ने 118 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है।
- भाजपा: 89 सीटें (सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी)
- शिंदे सेना: 29 सीटें
- ठाकरे गठबंधन (UBT + MNS + NCP-SP): मात्र 71 सीटों पर सिमट गया (शिवसेना UBT- 65, मनसे- 6)
- कांग्रेस: 24 सीटें
देवेंद्र फडणवीस: महाराष्ट्र के इकलौते ‘धुरंधर’
इन नतीजों ने देवेंद्र फडणवीस के राजनीतिक कद को और भी ऊंचा कर दिया है। फडणवीस ने इस चुनाव को ‘अस्मिता’ बनाम ‘विकास’ की लड़ाई बनाया था।
- माइक्रो-मैनेजमेंट: फडणवीस ने प्रत्येक वार्ड में उम्मीदवारों के चयन और प्रचार की कमान खुद संभाली।
- शहरी बुनियादी ढांचा: कोस्टल रोड, मेट्रो नेटवर्क और मुंबई सौंदर्यीकरण जैसे प्रोजेक्ट्स को उन्होंने अपनी मुख्य उपलब्धि के तौर पर पेश किया।
- गैर-मराठी और युवा वोट: भाजपा ने न केवल अपने पारंपरिक वोट बैंक को बचाए रखा, बल्कि गुजराती, उत्तर भारतीय और युवा मतदाताओं के बीच भी पैठ मजबूत की।
मुंबई में जश्न का माहौल
परिणामों की घोषणा के बाद मुंबई स्थित भाजपा मुख्यालय और एकनाथ शिंदे के आवास पर भारी जश्न देखा गया। ‘मुंबई का एक ही राजा, देवेंद्र फडणवीस’ और ‘मोदी-फडणवीस’ के नारों के साथ कार्यकर्ताओं ने गुलाल उड़ाकर जीत मनाई। फडणवीस ने इस जीत को “प्रधानमंत्री मोदी के विकासवाद की जीत” और “ईमानदारी की जीत” बताया है।
ठाकरे युग का अंत?
यह पहली बार है जब ठाकरे बंधु (उद्धव और राज) एक साथ आने के बावजूद मुंबई की सत्ता से दूर रह गए। 25 सालों तक बीएमसी की तिजोरी की चाबी संभालने वाली शिवसेना (UBT) के लिए यह एक बड़ा झटका है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अब मेयर भाजपा या शिंदे सेना का होगा, जो भविष्य में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए महायुति के मनोबल को और बढ़ाएगा।


