एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए चुनावी ट्रस्टों (Electoral Trusts) के माध्यम से राजनीतिक दलों को मिले चंदे पर अपनी नवीनतम रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, राजनीतिक फंडिंग के मामले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का वर्चस्व बरकरार है, जबकि कांग्रेस और अन्य दल काफी पीछे हैं।
यहाँ रिपोर्ट के मुख्य आंकड़े और निष्कर्ष दिए गए हैं:
1. चंदे का कुल वितरण: भाजपा बनाम अन्य
वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान कुल 10 चुनावी ट्रस्टों ने ₹3,826.34 करोड़ का चंदा प्राप्त किया और लगभग उतनी ही राशि (₹3,826.35 करोड़) विभिन्न राजनीतिक दलों को वितरित की।
| राजनीतिक दल | प्राप्त चंदा (₹ करोड़ में) | हिस्सेदारी (%) |
| भारतीय जनता पार्टी (BJP) | ₹3,157.65 | 82.52% |
| कांग्रेस (INC) | ₹298.78 | 7.81% |
| तृणमूल कांग्रेस (TMC) | ₹102.00 | 2.67% |
| अन्य 19 दल | ₹267.92 | 7.00% |
2. चंदा देने वाले प्रमुख ‘चुनावी ट्रस्ट’
रिपोर्ट के मुताबिक, 20 पंजीकृत चुनावी ट्रस्टों में से केवल 10 ने ही चंदा प्राप्त करने की जानकारी साझा की है।
- प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट (Prudent Electoral Trust): यह सबसे बड़ा दानदाता रहा, जिसने 15 राजनीतिक दलों को ₹2,668.46 करोड़ वितरित किए।
- प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट (Progressive Electoral Trust): इसने 10 दलों को ₹914.97 करोड़ का योगदान दिया।
3. शीर्ष कॉरपोरेट दानदाता
कुल चंदे का लगभग 95% हिस्सा कॉरपोरेट जगत से आया है। 228 कॉरपोरेट घरानों ने मिलकर ₹3,636.81 करोड़ दिए हैं।
- एलिवेटेड एवेन्यू रियल्टी LLP (Elevated Avenue Realty LLP): ₹500 करोड़ के साथ सबसे बड़ी दानदाता रही।
- टाटा संस (Tata Sons): ₹308.13 करोड़।
- TCS: ₹217.62 करोड़।
- मेघा इंजीनियरिंग (Megha Engineering): ₹175 करोड़।
4. रिपोर्ट की महत्वपूर्ण चिंताएं
ADR ने अपनी रिपोर्ट में पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर कुछ गंभीर सवाल भी उठाए हैं:
- अघोषित पते: लगभग ₹1,065.20 करोड़ के चंदे के मामले में दानदाताओं के पते का खुलासा नहीं किया गया है।
- नियमों का उल्लंघन: कुछ ट्रस्टों ने उस वित्तीय वर्ष में प्राप्त चंदे से अधिक राशि वितरित की (जैसे हार्मनी इलेक्टोरल ट्रस्ट), जो तकनीकी रूप से पिछले वर्षों के अधिशेष (Surplus) से जुड़ी हो सकती है।
- अनुपलब्ध रिपोर्ट: 20 में से 5 ट्रस्टों की रिपोर्ट समय सीमा बीतने के तीन महीने बाद भी चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं थी।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा इलेक्टोरल बॉन्ड (Electoral Bonds) को असंवैधानिक करार देने के बाद, चुनावी ट्रस्ट अब राजनीतिक फंडिंग का मुख्य जरिया बन गए हैं। आंकड़ों से स्पष्ट है कि सत्ताधारी दल (BJP) को मिलने वाला कॉर्पोरेट समर्थन विपक्षी दलों की तुलना में कई गुना अधिक है।


