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    4000 किलोमीटर दूर डिएगो गार्सिया पर हमला, ईरान की मिसाइल क्षमता ने बढ़ाई वैश्विक चिंता

    पश्चिम एशिया में जारी भीषण तनाव के बीच ईरान ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने पूरी दुनिया के सैन्य विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। शनिवार को आई रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने हिंद महासागर में स्थित अमेरिका और ब्रिटेन के अत्यंत महत्वपूर्ण और रणनीतिक सैन्य ठिकाने डिएगो गार्सिया (Diego Garcia) को निशाना बनाकर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं।

    यह हमला न केवल सैन्य रूप से बल्कि रणनीतिक रूप से भी एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है, क्योंकि डिएगो गार्सिया ईरानी सीमा से लगभग 4,000 किलोमीटर दूर स्थित है।


    कैसे हुआ हमला?

    वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) और अन्य अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने मध्यम दूरी की दो बैलिस्टिक मिसाइलों से इस द्वीप पर हमला करने की कोशिश की:

    • पहली मिसाइल: उड़ान के दौरान ही तकनीकी खराबी के कारण बीच रास्ते में गिर गई।
    • दूसरी मिसाइल: इसे रोकने के लिए क्षेत्र में तैनात एक अमेरिकी युद्धपोत ने SM-3 इंटरसेप्टर दागा। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि इंटरसेप्टर ने मिसाइल को पूरी तरह नष्ट किया या नहीं, लेकिन राहत की बात यह रही कि कोई भी मिसाइल सैन्य ठिकाने तक नहीं पहुंच पाई।

    ईरान की ‘सीक्रेट’ रेंज ने चौंकाया

    इस हमले ने सबसे ज्यादा चिंता ईरान की मिसाइल क्षमता को लेकर पैदा की है।

    1. घोषित बनाम वास्तविक क्षमता: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में दावा किया था कि उनकी मिसाइलों की अधिकतम रेंज 2,000 किलोमीटर है।
    2. दूरी का गणित: डिएगो गार्सिया की दूरी ईरान से 4,000 किमी है। इस हमले से संकेत मिलता है कि ईरान ने चोरी-छिपे ऐसी तकनीक विकसित कर ली है जो उसकी घोषित क्षमता से दोगुनी दूरी तक मार कर सकती है।
    3. यूरोप के लिए खतरा: विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान 4,000 किमी तक निशाना साध सकता है, तो अब यूरोप के कई बड़े शहर भी उसकी जद में आ गए हैं।

    डिएगो गार्सिया का महत्व

    डिएगो गार्सिया हिंद महासागर में स्थित एक छोटा सा एतोल (Atoll) है, जो अमेरिकी वायुसेना और नौसेना के लिए ‘अजेय किला’ माना जाता है। यहाँ से अमेरिका मध्य पूर्व, अफ्रीका और एशिया में अपने सैन्य अभियानों को नियंत्रित करता है। अफगानिस्तान और इराक युद्ध के दौरान लंबी दूरी के बमवर्षकों ने यहीं से उड़ान भरी थी।

    बढ़ता युद्ध का दायरा

    यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत ईरान के सैकड़ों ठिकानों पर बमबारी कर रहा है। ईरान के इस जवाबी हमले ने युद्ध के थिएटर को खाड़ी देशों से निकालकर अब खुले हिंद महासागर तक फैला दिया है। व्हाइट हाउस और ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन पेंटागन ने क्षेत्र में अपनी निगरानी और सुरक्षा बढ़ा दी है।

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