भूपेन बोरा का इस्तीफा असम कांग्रेस के लिए एक बड़े राजनीतिक संकट के रूप में सामने आया है। 16 फरवरी 2026 को असम के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोरा ने पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। असम विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक कुछ महीने पहले आया यह इस्तीफा कांग्रेस की चुनावी संभावनाओं को गंभीर चोट पहुंचा सकता है। भूपेन बोरा पिछले 32 वर्षों (1994 से) से कांग्रेस के साथ जुड़े हुए थे।
इस्तीफे के पीछे के बड़े कारण
भूपेन बोरा ने अपने त्यागपत्र में पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी कलह और नेतृत्व पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं:
- अनदेखी का आरोप: बोरा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को लिखे पत्र में कहा कि उन्हें पार्टी के भीतर ‘अनदेखा’ किया जा रहा था और उन्हें वह सम्मान नहीं मिल रहा था जिसके वह हकदार थे।
- गौरव गोगोई से मतभेद: उन्होंने वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष और सांसद गौरव गोगोई की कार्यशैली और “पक्षपात” (Favouritism) को अपने इस्तीफे की एक बड़ी वजह बताया।
- आत्मसम्मान की लड़ाई: मीडिया से बात करते हुए बोरा ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह फैसला अपने ‘आत्मसम्मान’ की रक्षा के लिए लिया है।
- अंदरूनी गुटबाजी: पिछले कुछ महीनों से असम कांग्रेस में ‘भूपेन बोरा हटाओ’ अभियान और रकीबुल हुसैन के बढ़ते प्रभाव के कारण वह हाशिए पर महसूस कर रहे थे।
सियासी गलियारों में हलचल और भाजपा का तंज
इस इस्तीफे के बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “भूपेन बोरा असम कांग्रेस के आखिरी प्रमुख हिंदू नेता थे। अब कांग्रेस में केवल वे ही टिक सकते हैं जिनके पिता का नाम बड़ा हो या जो एक विशेष अल्पसंख्यक समुदाय से आते हों।”
भविष्य की योजना: क्या BJP में होंगे शामिल?
भूपेन बोरा ने फिलहाल किसी दूसरी पार्टी में शामिल होने का औपचारिक ऐलान नहीं किया है, लेकिन उन्होंने सक्रिय राजनीति में बने रहने की बात कही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वह आगामी चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) या किसी क्षेत्रीय दल के साथ हाथ मिला सकते हैं।
असम विधानसभा (कुल 126 सीटें) की वर्तमान स्थिति:
| दल/गठबंधन | सीटें |
| NDA (BJP + Allies) | 83 |
| Opposition (Congress + Others) | 42 |
| अन्य | 01 |
चुनावों से ऐन पहले भूपेन बोरा जैसे कद्दावर नेता का जाना कांग्रेस के लिए एक ‘डैमेज कंट्रोल’ की स्थिति पैदा कर रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि गौरव गोगोई के नेतृत्व में कांग्रेस इस झटके से कैसे उबरती है।


